गुरूवार, 10 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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बिहार में बाढ़: पानी उतरने लगा, पर लाखों परिवारों के लिए असली चुनौती अब शुरू होगी

बिहार में बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे कम हो रहा हो, लेकिन इससे प्रभावित हुए लाखों परिवारों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 14 जिलों में…

बिहार में बाढ़: पानी उतरने लगा, पर लाखों परिवारों के लिए असली चुनौती अब शुरू होगी
(फोटो: IANS)

बिहार में बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे कम हो रहा हो, लेकिन इससे प्रभावित हुए लाखों परिवारों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 14 जिलों में करीब 40.21 लाख लोग इस आपदा से जूझ रहे हैं। अब जब पानी उतर रहा है, तो इन लोगों के सामने अपने तबाह हो चुके घरों को फिर से बसाने और जिंदगी को पटरी पर लाने की एक बड़ी और कठिन चुनौती खड़ी है।

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आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गंगा समेत कई नदियों में उफान के कारण पटना, भोजपुर, सारण, भागलपुर और मुंगेर जैसे 14 जिलों के 84 प्रखंडों की 514 ग्राम पंचायतें बाढ़ की चपेट में आईं। गांव-घर डूब जाने के बाद हजारों परिवार अपना जरूरी सामान और मवेशियों को लेकर सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर चले गए थे।

सड़कों और पार्कों में तंबू, भविष्य की चिंता

पटना के मरीन ड्राइव से लेकर मुंगेर के कलेक्ट्रेट परिसर तक, कई परिवार तिरपाल के तंबूओं में रहने को मजबूर हैं। इन अस्थायी आशियानों में बच्चे, बूढ़े और मवेशी एक साथ रह रहे हैं। मुंगेर के एक ग्रामीण मुनेश्वर ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा, "घर में पानी घुसने के बाद जरूरी सामान लेकर यहां आना पड़ा। अभी तो किसी तरह तंबू में रह रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ी चिंता यह है कि पानी उतरने के बाद घर लौटेंगे तो घर की क्या हालत होगी।"

इन लोगों के लिए पशु सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का मुख्य साधन हैं। इसीलिए वे हर मुश्किल के बावजूद उन्हें अपने साथ रखे हुए हैं। पटना के मरीन ड्राइव पर शरण लिए एक व्यक्ति ने बताया कि मवेशियों के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो रहा है और बच्चों की पढ़ाई भी रुक गई है।

बाढ़ के बाद की चुनौतियां

लोगों का कहना है कि उनकी असली परीक्षा पानी उतरने के बाद शुरू होगी। घरों में जमा कीचड़ की सफाई, कमजोर हो चुकी दीवारों की मरम्मत, और खराब हो चुके अनाज को हटाना पहली चुनौती होगी। किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, जिससे अगली फसल के लिए पूंजी जुटाने का संकट है, वहीं मजदूरों के सामने रोजगार का सवाल है।

इसके अलावा, बाढ़ के बाद जमा हुए गंदे पानी से डायरिया, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। बाढ़ पीड़ितों के अनुसार, घर दोबारा खड़ा करना, खेतों को फिर से तैयार करना और बच्चों की पढ़ाई को पटरी पर लाना, यह सब एक लंबा संघर्ष होगा।

इनपुट: IANS

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News4Social बिहार डेस्क

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