शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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बिहार बाढ़: सांसद पप्पू यादव ने राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की उठाई मांग, 40 साल के भ्रष्टाचार की जांच पर दिया जोर

बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने इसे तत्काल राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया है कि राज्य के 25 जिलों में बाढ़ से करीब 55…

बिहार बाढ़: सांसद पप्पू यादव ने राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की उठाई मांग, 40 साल के भ्रष्टाचार की जांच पर दिया जोर
(फोटो: IANS)

बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने इसे तत्काल राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया है कि राज्य के 25 जिलों में बाढ़ से करीब 55 लाख लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और उनके सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है।

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समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में पप्पू यादव ने दशकों से चली आ रही सरकारी लापरवाही को इस त्रासदी का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, "40 साल में सरकारें आपदा लेकर आईं। नदियों को बर्बाद किया गया। उनकी सफाई नहीं हुई और बांधों को पक्का नहीं किया गया।" यादव ने आरोप लगाया कि बाढ़ से निपटने के नाम पर बड़े पैमाने पर लूट हुई है।

भ्रष्टाचार की CBI-ED जांच की मांग

सांसद पप्पू यादव ने बाढ़ राहत कार्यों और सिंचाई परियोजनाओं में भ्रष्टाचार की उच्चतम स्तर पर जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई और ईडी को पिछले 40 वर्षों में बिहार के सभी सिंचाई मंत्रियों, संबंधित ठेकेदारों, पदाधिकारियों और सचिवों की संपत्ति की जांच करनी चाहिए। उनका आरोप है कि इन लोगों ने अपने पद का दुरुपयोग कर सिर्फ अपने घर भरे हैं।

विपक्ष और सरकार दोनों पर साधा निशाना

पप्पू यादव ने राज्य के मौजूदा विपक्ष और सरकार, दोनों पर निशाना साधा। उन्होंने तेजस्वी यादव का नाम लिए बिना कहा, "विपक्ष के नेताओं के माता-पिता मुख्यमंत्री रहे। तब उन्हें ये हालात याद नहीं रहे। वे दो-दो बार खुद उपमुख्यमंत्री रहे।" वहीं, केंद्र और राज्य की 'डबल इंजन' सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट तक नहीं किया है। उन्होंने बिल्कुल बाढ़ की चर्चा नहीं की।"

बाढ़ पीड़ितों की बदहाली का जिक्र

पप्पू यादव ने बाढ़ प्रभावित लोगों की दयनीय स्थिति का वर्णन करते हुए बताया कि लोगों के पास खाना नहीं है, बच्चों के लिए दूध तक उपलब्ध नहीं है और महिलाएं सड़कों पर सोने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि पशुओं का चारा खत्म हो गया है, छोटे किसान पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं और आम आदमी कीड़े-मकौड़ों की तरह जीने को विवश है। उन्होंने बक्सर से लेकर बनिहारी तक किसी भी सामुदायिक रसोई के न होने का भी दावा किया।

इनपुट: IANS

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News4Social बिहार डेस्क

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