मिशन शक्तिसैट: 108 देशों की 12,000 बेटियां भारत में सीख रहीं सैटेलाइट तकनीक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में भारत की बेटियों की बढ़ती ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी उड़ान अब धरती से अंतरिक्ष तक पहुंच गई है। उन्होंने इस संदर्भ में 'मिशन…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में भारत की बेटियों की बढ़ती ताकत का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी उड़ान अब धरती से अंतरिक्ष तक पहुंच गई है। उन्होंने इस संदर्भ में 'मिशन शक्तिसैट' नामक एक अनूठी वैश्विक पहल पर प्रकाश डाला, जो दुनिया भर की हजारों छात्राओं को सैटेलाइट टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर दे रही है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पीएम मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि यह मिशन 108 देशों की 12,000 छात्राओं को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) शिक्षा से जोड़ रहा है। इस मिशन का मकसद लड़कियों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में प्रोत्साहित करना है, जिसमें उन्हें सैटेलाइट बनाने से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान की जटिलताएँ सिखाना शामिल है।
क्या है मिशन शक्तिसैट का लक्ष्य?
प्रधानमंत्री ने इस प्रयास के खास लक्ष्य के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस मिशन के तहत पूरी तरह से छात्राओं की भागीदारी से तैयार एक सैटेलाइट को चंद्रमा की कक्षा (Moon's orbit) में भेजने की तैयारी चल रही है। उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि इनमें से अनेक छात्राएं आने वाले समय में साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बनाएंगी।" यह पहल न सिर्फ भारतीय, बल्कि दुनिया भर की छात्राओं को एक साझा मंच प्रदान कर रही है।
ग्रेटर नोएडा में दूसरे चरण की शुरुआत
पीएम मोदी ने यह भी बताया कि 23 अगस्त को 'नेशनल स्पेस डे' के अवसर पर उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में इस मिशन के दूसरे चरण की शुरुआत हुई। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों और भारत के दूर-दराज के क्षेत्रों से आईं लगभग 100 छात्राएं एक साथ जुटीं। प्रधानमंत्री ने इसे मिशन शक्तिसैट की एक 'सुंदर तस्वीर' बताया।
इनपुट: IANS



