AI से दवा खोज: सरकार ने पेप्ट्रिस के एडवांस प्रोग्राम के लिए 86 करोड़ रुपए की मदद को दी मंजूरी
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नई दवाओं के विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत आने वाले टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट…
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नई दवाओं के विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत आने वाले टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते के तहत सरकार कंपनी के AI-आधारित दवा विकास कार्यक्रम के लिए 86 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता देगी।
यह वित्तीय मदद रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड के तहत ऑप्शनली कन्वर्टिबल डेट (OCD) के रूप में दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 172 करोड़ रुपए है, जिसका आधा हिस्सा सरकार की ओर से प्रदान किया जा रहा है। इसका उद्देश्य AI द्वारा खोजे गए दवा के अणुओं को प्रयोगशाला से क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी तक पहुंचाना है।
प्रोजेक्ट का लक्ष्य और दवाएं
इस परियोजना का नाम 'वीगर: एडवांसिंग एआई-डिस्कवर्ड मॉलीक्यूल्स फ्रॉम बेंच टू क्लीनिक' रखा गया है। इसके तहत, चार संभावित दवाओं को विकास के शुरुआती चरण (टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल - TRL-4) से क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी (TRL-6) के स्तर तक ले जाने का लक्ष्य है। पेप्ट्रिस का यह कार्यक्रम उन गंभीर बीमारियों पर केंद्रित है जिनके लिए आज भी प्रभावी उपचार की सख्त जरूरत है।
इन चार दवाओं पर होगा काम:
- पीईपीआर111: न्यूरोमस्कुलर विकार और कैंसर के लिए।
- पीईपीआरएक्स101: बाल झड़ने की समस्या (एलोपेसिया) के लिए।
- पीईपीआर202: न्यूरोपैथी (नसों से जुड़ी समस्या) के लिए।
- पीईपीआर112: ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (मांसपेशियों की एक गंभीर बीमारी) के लिए।
तीन साल तक चलने वाली इस परियोजना में उन्नत प्री-क्लिनिकल अध्ययन, फॉर्मूलेशन डेवलपमेंट और क्लिनिकल ट्रायल से जुड़ी शुरुआती गतिविधियां शामिल होंगी।
AI से स्वास्थ्य सेवा में क्रांति की उम्मीद
सरकार का मानना है कि यह पहल AI आधारित खोज और क्लिनिकल विकास के बीच की खाई को पाटेगी। इससे भारत की बायोटेक्नोलॉजी, फार्मा और AI-आधारित हेल्थकेयर नवाचार क्षमताओं को मजबूती मिलेगी। TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा, "फार्मास्युटिकल अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग नई दवाओं की खोज और विकास की प्रक्रिया को बदलने की क्षमता रखता है।" उन्होंने जोर दिया कि संभावनाशील खोजों को वास्तविक दवाओं में बदलने के लिए लगातार निवेश और वैज्ञानिक सत्यापन जरूरी है।
वहीं, पेप्ट्रिस के प्रतिनिधि ने कहा कि RDI फंड से मिली यह मदद कंपनी को महत्वपूर्ण प्री-क्लिनिकल चरणों को पूरा करने और AI से खोजे गए अणुओं को तेजी से क्लिनिकल विकास की ओर ले जाने में सक्षम बनाएगी।
इनपुट: IANS



