भाजपा ने कांग्रेस के सुप्रीम कोर्ट मार्च को 'घेराव' बताया, अवमानना का मुकदमा चलाने की मांग
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस के प्रस्तावित सुप्रीम कोर्ट मार्च की तीखी आलोचना करते हुए इसे न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश बताया है। पार्टी के नेता प्रतुल शाहदेव ने मांग की है कि इस…
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस के प्रस्तावित सुप्रीम कोर्ट मार्च की तीखी आलोचना करते हुए इसे न्यायपालिका पर दबाव बनाने की कोशिश बताया है। पार्टी के नेता प्रतुल शाहदेव ने मांग की है कि इस मार्च में शामिल होने वालों के खिलाफ अदालत की अवमानना का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में शाहदेव ने कहा कि यह केवल एक 'मार्च' नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट का 'घेराव' करने का प्रयास है। उन्होंने सवाल उठाया, "अगर यह सच में सिर्फ एक मार्च था, तो वे देश भर से कांग्रेस के विधायक, सांसद, वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ राज्य और राष्ट्रीय पदाधिकारियों को क्यों बुला रहे हैं?" उनके अनुसार, कांग्रेस दिल्ली की सड़कों पर अराजकता फैलाना चाहती है।
संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव का आरोप
प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस पर महान संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "पहले कांग्रेस ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर का घेराव किया और राष्ट्रपति को मेमोरेंडम दिया; चीफ इलेक्शन कमिश्नर के खिलाफ प्रोटेस्ट के दौरान वे आकाशवाणी का भी घेराव करने चले गए, जैसे वे ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन पर कब्जा करना चाहते हों।" शाहदेव ने मार्च करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा 'इंडिया' गठबंधन के प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार करने के फैसले का भी समर्थन किया। शाहदेव ने कहा, "सामान्य तौर पर सीजेआई किसी राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलते। सीजेआई की ओर से बिल्कुल सही कहा गया है कि अगर उनकी कोई गिला-शिकवा या शिकायत है तो याचिका डालें और उस पर सुनवाई होगी।" उन्होंने इसे एक विचाराधीन मामले पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया।
सीजेपी नेताओं की रिहाई
इस बीच, एक अन्य मामले में भाजपा नेता विनुशा रेड्डी ने सीजेपी के तीन नेताओं की रिहाई पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को शांति बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने के बाद जमानत दी गई है। कथित तौर पर इन तीनों ने एक अंडरटेकिंग पर हस्ताक्षर किए हैं कि वे एक साल तक शांति भंग करने वाली किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे।
इनपुट: IANS



