रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे पर यूरोपीय संघ का बड़ा प्रहार, 1600 नए प्रतिबंधों को दी मंज़ूरी
यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत यूरोपीय संघ (ईयू) ने अब तक की सबसे बड़ी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ईयू के विदेश मंत्रियों ने…
यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत यूरोपीय संघ (ईयू) ने अब तक की सबसे बड़ी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ईयू के विदेश मंत्रियों ने रूस के खिलाफ लगभग 1,600 नए प्रतिबंधों के एक बड़े पैकेज को मंज़ूरी दी है।
ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसकी जानकारी देते हुए कहा, "यूरोपीय संघ (ईयू) के विदेश मंत्रियों ने रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे को निशाना बनाते हुए लगभग 1,600 नए प्रतिबंधों को मंजूरी दी है। रूस की ओर से युद्ध शुरू किए जाने के बाद से यह प्रतिबंध सूची का अब तक का सबसे बड़ा विस्तार माना जा रहा है।"
प्रतिबंधों का मुख्य निशाना
काजा कल्लास के मुताबिक, इन नए प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य रूस की हथियार निर्माण क्षमता को धीमा, महंगा और कठिन बनाना है। उन्होंने बताया कि सूची में शामिल आधे से अधिक लोग, कंपनियाँ और संस्थाएँ सीधे तौर पर बैलिस्टिक मिसाइलों के उत्पादन और उनकी आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) से जुड़ी हुई हैं।
प्रतिबंधों का समय और संदर्भ
ईयू द्वारा यह कदम अमेरिका के साथ हुए रूस के एक डीज़ल समझौते के बाद उठाया गया है। यूरोपीय संघ का मानना है कि इस समझौते से रूस का व्यापार बढ़ेगा, और वह इस कमाई का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ अपनी सैन्य ताकत को और बढ़ाने में कर सकता है।
इसी संदर्भ में, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ तीन लाख टन से अधिक डीज़ल की आपूर्ति का समझौता किया था। सीबीएस न्यूज़ के अनुसार, ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की रूसी डीज़ल रिफाइनरियों को निशाना बनाने के लिए आलोचना की थी।
ट्रंप ने कहा था, "जेलेंस्की जो चाहे कर सकते हैं लेकिन वह यह नहीं कर सकते क्योंकि यह पूरी दुनिया की समस्या है।" उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया इस समय डीज़ल ईंधन की रिफाइनिंग क्षमता की कमी का सामना कर रही है और अब यूक्रेन को नया राष्ट्रपति मिलना चाहिए।
इनपुट: IANS



