गुरूवार, 17 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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युद्ध अभ्यास 2026: उत्तराखंड और राजस्थान में भारतीय-अमेरिकी सेनाओं का आतंकवाद-रोधी संयुक्त प्रशिक्षण

भारत और अमेरिका की सेनाएं 'युद्ध अभ्यास 2026' नामक एक बड़े संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण में जुटी हैं, जिसका उद्देश्य आतंकवाद-रोधी अभियानों में आपसी समन्वय और क्षमताओं को बेहतर बनाना है। यह अभ्यास एक सा…

युद्ध अभ्यास 2026: उत्तराखंड और राजस्थान में भारतीय-अमेरिकी सेनाओं का आतंकवाद-रोधी संयुक्त प्रशिक्षण
(फोटो: IANS)

भारत और अमेरिका की सेनाएं 'युद्ध अभ्यास 2026' नामक एक बड़े संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण में जुटी हैं, जिसका उद्देश्य आतंकवाद-रोधी अभियानों में आपसी समन्वय और क्षमताओं को बेहतर बनाना है। यह अभ्यास एक साथ दो अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों — उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ी इलाके औली से लेकर राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज तक — में चल रहा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस व्यापक अभ्यास में दोनों देशों के लगभग 600-600 सैनिक, कुल मिलाकर 1200 जवान हिस्सा ले रहे हैं।

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इस संयुक्त प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तराखंड के औली में आयोजित किया गया। यहां सैनिकों ने आतंकी ठिकानों पर धावा बोलने और बेहद सीमित जगह वाले कमरों में घुसकर उन्हें सुरक्षित करने की कार्रवाई का अभ्यास किया। इस तरह के अभियानों में गति और सटीकता सर्वोपरि होती है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह ड्रिल डिजाइन की गई।

आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता का संगम

अभ्यास के दौरान पारंपरिक सैन्य कौशल के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया गया। सैन्य टीमों ने ड्रोन, रोबोटिक डॉग, प्रशिक्षित मिलिट्री डॉग और स्नाइपरों के साथ मिलकर अभियान चलाने का अभ्यास किया। इस दौरान अमेरिकी सेना के जवानों ने भारतीय सैनिकों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे उपकरणों और तकनीकों को भी करीब से देखा और समझा।

प्रशिक्षण के दौरान दोनों सेनाओं के बीच अनुभवों और पेशेवर जानकारी का भी आदान-प्रदान हुआ। इसका लक्ष्य आतंकवाद के खिलाफ अभियानों में सामरिक समझ, पेशेवर तालमेल और संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता को और मजबूत करना है।

रणनीतिक सहयोग और भविष्य की तैयारी

यह अभ्यास सिर्फ मैदानी कार्रवाई तक ही सीमित नहीं है। इसमें निगरानी और जासूसी के लिए ड्रोन और अन्य स्वचालित प्रणालियों का उपयोग भी शामिल है। इसके अलावा, दोनों देशों के सैन्य विशेषज्ञ उभरती हुई सैन्य तकनीकों और युद्ध के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा कर रहे हैं, ताकि भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर रणनीति बनाई जा सके। यह अभ्यास पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी इलाकों में एकीकृत युद्ध समूहों के संचालन की क्षमता को मजबूत करने पर केंद्रित है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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