UPI पेमेंट पर MDR से बढ़ेगा ब्रोकरों का खर्च? SEBI करेगा चिंताओं की समीक्षा
निवेश और ब्रोकिंग से जुड़ी UPI पेमेंट पर लगने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर स्टॉकब्रोकरों ने जो चिंताएं जताई हैं, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) उन पर विचार करेगा। समाचार…
निवेश और ब्रोकिंग से जुड़ी UPI पेमेंट पर लगने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर स्टॉकब्रोकरों ने जो चिंताएं जताई हैं, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) उन पर विचार करेगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने गुरुवार को मुंबई में यह आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं और नियामक उनकी जांच करेगा।
यह पूरा मामला UPI से व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) भुगतान पर लागू हुए नए MDR ढांचे से जुड़ा है, जिससे ब्रोकरेज उद्योग पर अतिरिक्त लागत का बोझ पड़ने की आशंका है। पांडे का यह बयान नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (NaBFID) के एक कार्यक्रम के दौरान आया, जो ब्रोकरों द्वारा चिंता जताए जाने के ठीक एक दिन बाद था।
क्या है ब्रोकरों की मुख्य चिंता?
इस मुद्दे पर जेरोधा (Zerodha) के सीईओ नितिन कामथ ने विस्तार से अपनी बात रखी थी। उन्होंने एक तरफ तो UPI के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए MDR लागू करने को ज़रूरी बताया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि निवेश और ब्रोकिंग जैसे कुछ मामलों में यह ढांचा व्यावहारिक नहीं लगता।
कामथ ने समझाया कि कई बार ग्राहक अपने ब्रोकिंग खाते में UPI के ज़रिए पैसे तो जमा कर देते हैं, लेकिन उसके बाद कोई ट्रेड यानी खरीद-बिक्री नहीं करते। ऐसी स्थिति में ब्रोकर को MDR शुल्क तो देना पड़ता है, लेकिन उसे कोई कमाई नहीं होती। उन्होंने कहा, “चूंकि वे ग्राहकों को ट्रेड करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते, इसलिए यदि एमडीआर का शुल्क ग्राहकों पर नहीं डाला जा सकता तो ब्रोकर्स को बिना किसी आय के अतिरिक्त लागत उठानी पड़ सकती है।”
लागत का बोझ कितना बड़ा?
लागत के असर को समझाने के लिए नितिन कामथ ने एक उदाहरण भी दिया। उनके मुताबिक, अगर 10,000 ग्राहक एक महीने में 2-2 लाख रुपये के 50 UPI ट्रांसफर करें और कोई ट्रेड न करें, तो नए MDR नियमों के तहत एक ब्रोकर पर करीब 2 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आ सकता है।
इसके अलावा, उन्होंने सेबी के त्रैमासिक निपटान (Quarterly Settlement) नियम का भी ज़िक्र किया, जिसके तहत ब्रोकरों को ग्राहकों के बिना इस्तेमाल वाले पैसे हर महीने या तिमाही में लौटाने होते हैं। कामथ ने बताया कि ग्राहक अक्सर यह पैसा फौरन वापस अपने ब्रोकिंग खाते में जमा कर देते हैं, जिसमें बड़ा हिस्सा UPI से आता है। इससे बार-बार फंड ट्रांसफर पर ब्रोकरों को बिना किसी अतिरिक्त आय के MDR शुल्क चुकाना पड़ सकता है। इसे देखते हुए उन्होंने ब्रोकिंग से जुड़े UPI भुगतानों के लिए कम ट्रांजैक्शन लिमिट रखने का सुझाव दिया है।
इनपुट: IANS



