शेयर बाज़ार में हेरफेर: SEBI ने दो कंपनियों और 6 लोगों की ₹28 करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति फ्रीज़ की
शेयर बाज़ार के वायदा और विकल्प (Futures & Options) सेगमेंट में कथित तौर पर हेरफेर करके मोटी कमाई करने के एक मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। बाज़ार नियामक SEBI ने इस मामले में दो कंपनियों और छह…
शेयर बाज़ार के वायदा और विकल्प (Futures & Options) सेगमेंट में कथित तौर पर हेरफेर करके मोटी कमाई करने के एक मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। बाज़ार नियामक SEBI ने इस मामले में दो कंपनियों और छह व्यक्तियों पर शिकंजा कसते हुए उनकी ₹28.12 करोड़ की संपत्ति फ्रीज़ कर दी है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के मुताबिक, इन सभी को डेरिवेटिव्स में कारोबार करने से भी रोक दिया गया है।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और सेबी की निगरानी प्रणालियों ने कुछ खातों में असामान्य कारोबारी गतिविधियों को लेकर अलर्ट जारी किया। शुरुआती जांच में पाया गया कि एक कंपनी, प्रसार संपदा प्राइवेट लिमिटेड, ने कुछ चुनिंदा शेयरों के ऑप्शंस में बड़ा मुनाफा कमाया, जबकि उन्हीं शेयरों के फ्यूचर्स सौदों में उसे नुकसान हो रहा था। यह पैटर्न शक के दायरे में आ गया।
कैसे की गई हेरफेर?
सेबी के एक अंतरिम आदेश के अनुसार, इन कंपनियों और व्यक्तियों ने कथित तौर पर एक खास रणनीति अपनाई। वे ऐसे शेयरों को चुनते थे, जिनका बाज़ार पूंजीकरण कम था और जिनमें ज़्यादा खरीद-बिक्री नहीं होती थी। आरोप है कि वे इन शेयरों के 'नियर-द-मनी' ऑप्शंस में बाज़ार भाव से बहुत ऊपर और नीचे की कीमतों पर बड़ी संख्या में ऑर्डर लगाते थे, लेकिन उन्हें पूरा (execute) नहीं होने देते थे।
इस बीच, वे दिन के अलग-अलग समय पर उन्हीं शेयरों के फ्यूचर्स में कभी खरीदार तो कभी बिकवाल की भूमिका निभाते थे। नियामक को शक है कि ऑप्शंस के अधूरे ऑर्डर और फ्यूचर्स की पोजीशन का एक साथ इस्तेमाल करके बाज़ार को प्रभावित किया गया और अवैध मुनाफा कमाया गया। जब NSE ने फरवरी-मार्च 2026 में प्रसार को इस बारे में सूचित किया, तो उसने अपने खाते में यह गतिविधि बंद कर दी। लेकिन बाद में जांच के दौरान चौबारा ईट्स प्राइवेट लिमिटेड के खातों में भी ठीक वैसा ही पैटर्न मिला।
इन पर हुई कार्रवाई
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय द्वारा जारी आदेश में प्रसार संपदा प्राइवेट लिमिटेड और चौबारा ईट्स प्राइवेट लिमिटेड के अलावा चार व्यक्तियों—वेद प्रकाश गुप्ता, प्रीति गुप्ता, सरोज गुप्ता और गौरव तोमर—पर कार्रवाई की गई है। इन सभी को संयुक्त रूप से ₹28.12 करोड़ की रकम एक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में जमा करने का निर्देश दिया गया है।
साथ ही, इन सभी छह पक्षों के प्रतिभूति बाज़ार में कारोबार करने पर रोक लगा दी गई है। हालांकि, अगर वे यह निर्धारित राशि जमा कर देते हैं, तो उन्हें कैश सेगमेंट में कारोबार की अनुमति मिल जाएगी, लेकिन इक्विटी डेरिवेटिव्स में वे ट्रेडिंग नहीं कर पाएंगे। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है।
इनपुट: IANS



