UPI पर MDR क्यों है ज़रूरी? फिनटेक कंपनियों ने बताया- सिस्टम को टिकाऊ बनाने के लिए कमाई अहम
भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) ने डिजिटल भुगतान में क्रांति ला दी है, लेकिन इसे चलाने वाली कंपनियों के लिए यह आर्थिक रूप से एक बोझ बनता जा रहा है। फिनटेक जगत के प्रमुखों का मानना है कि इस…
भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) ने डिजिटल भुगतान में क्रांति ला दी है, लेकिन इसे चलाने वाली कंपनियों के लिए यह आर्थिक रूप से एक बोझ बनता जा रहा है। फिनटेक जगत के प्रमुखों का मानना है कि इस इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने और इसका विस्तार एक अरब लोगों तक करने के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करना एक ज़रूरी कदम है।
समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में फिनटेक कंपनी मोबिक्विक की सह-संस्थापक और सीएफओ उपासना टाकू ने कहा कि एक दशक से अधिक समय से UPI भारतीय अर्थव्यवस्था को बदलने और वित्तीय उत्पादों को आम लोगों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हालाँकि, इसका एक दूसरा पहलू भी है। उन्होंने बताया, "इसका आर्थिक बोझ वित्तीय कंपनियों और बैंकों को उठाना पड़ रहा है, क्योंकि यूपीआई से आय शून्य है और यह पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा बन गया है।"
विकास के लिए स्थिरता ज़रूरी
टाकू के अनुसार, अभी लगभग 50 से 60 करोड़ लोग ही UPI का उपयोग कर रहे हैं। अगर अगले दशक में इस संख्या को एक अरब तक ले जाना है, तो इस सिस्टम से एक स्थिर आय का स्रोत बनाना होगा। उन्होंने बताया कि एक UPI लेनदेन को प्रोसेस करने में सिर्फ सर्वर की लागत ही 17 से 20 पैसे आती है।
इसके अलावा, प्लेटफॉर्म को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक बड़ी इंजीनियरिंग टीम, जोखिम प्रबंधन (Risk Management) और साइबर सुरक्षा पर भारी निवेश करना पड़ता है। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी इन खर्चों का केवल 10 प्रतिशत ही कवर कर पाती थी। ऐसे में MDR लागू होने से इस पूरे सिस्टम को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
छोटे व्यापारियों पर नहीं पड़ेगा असर
मोबिक्विक के सह-संस्थापक, एमडी और सीईओ बिपिन प्रीत सिंह ने भी इस विचार का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत पिछले एक दशक में दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट इकोसिस्टम बना है, जिसका श्रेय UPI को जाता है। लेकिन इसे चलाने वाले बैंकों और वित्तीय कंपनियों को एक बड़ी लागत वहन करनी पड़ती है।
सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित UPI MDR केवल 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर ही लागू होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि छोटे दुकानदारों और आम लोगों द्वारा किए जाने वाले छोटे-मोटे लेनदेन पर इसका कोई प्रभाव न पड़े, जिससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलता रहेगा।
इनपुट: IANS



