बुधवार, 16 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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दल-बदल कर दोबारा चुनाव लड़ने वाले विधायकों पर मद्रास हाईकोर्ट की गंभीर टिप्पणी, इसे बताया 'मतदाताओं का अपमान'

मद्रास हाईकोर्ट ने उस चलन पर गहरी चिंता व्यक्त की है जहाँ विधायक एक पार्टी से इस्तीफा देकर दूसरी में शामिल होते हैं और फिर उसी सीट से उपचुनाव लड़ते हैं। अदालत ने इस प्रक्रिया को मतदाताओं के जनादेश का…

दल-बदल कर दोबारा चुनाव लड़ने वाले विधायकों पर मद्रास हाईकोर्ट की गंभीर टिप्पणी, इसे बताया 'मतदाताओं का अपमान'
(फोटो: IANS)

मद्रास हाईकोर्ट ने उस चलन पर गहरी चिंता व्यक्त की है जहाँ विधायक एक पार्टी से इस्तीफा देकर दूसरी में शामिल होते हैं और फिर उसी सीट से उपचुनाव लड़ते हैं। अदालत ने इस प्रक्रिया को मतदाताओं के जनादेश का 'अपमान' और लोकतंत्र का 'मजाक' करार दिया है। बुधवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान, अदालत ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए।

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समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यह टिप्पणी जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस के. गोविंदराजन की खंडपीठ ने चेन्नई के वकील के. सुथन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका में मांग की गई थी कि चुने हुए प्रतिनिधियों को दल-बदल कर तुरंत उपचुनाव लड़ने से रोकने के लिए नियम बनाए जाएं।

याचिका में क्या तर्क दिए गए?

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आर. सिंगारावेलन ने अदालत को बताया कि इस चलन से जनता पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ता है और आम चुनाव में मतदाताओं की पसंद का महत्व कम होता है। उन्होंने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि इस साल विधानसभा चुनाव के बाद AIADMK के छह विधायकों ने इस्तीफा दे दिया और सत्तारूढ़ 'तमिलगा वेत्री कजगम' (TVK) में शामिल हो गए।

वकील ने बताया कि इनमें से दो विधायकों, मरगथम कुमारवेल (मदुरंतकम) और पी. सत्यभामा (धारापुरम) को TVK ने उन्हीं सीटों से उम्मीदवार बनाया है जो उनके इस्तीफे के कारण खाली हुई हैं। उन्होंने आगाह किया कि अगर इस प्रवृत्ति को नहीं रोका गया तो भविष्य में बड़े पैमाने पर इस्तीफे हो सकते हैं, जिससे बार-बार उपचुनाव होंगे और सरकारी खजाने को भारी नुकसान होगा।

अदालत ने चुनाव आयोग से क्या कहा?

अदालत ने इस पूरे मामले को लोकतंत्र के लिए गंभीर बताया। जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम ने कहा, "जो विधायक सिर्फ दूसरी पार्टी के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा देते हैं, वे शायद लोकतंत्र का मजाक उड़ा रहे हैं।"

पीठ ने चुनाव आयोग से सवाल किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मिली अपनी शक्तियों का उपयोग कर इस मामले की जांच क्यों नहीं करता और उचित दिशानिर्देश क्यों नहीं बनाता। अदालत ने आयोग को यह विचार करने का निर्देश दिया कि क्या केवल पार्टी बदलने और फिर से चुनाव लड़ने के उद्देश्य से दिए जाने वाले इस्तीफों को रोकने के लिए कोई नियम बनाए जा सकते हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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