टेंडर घोटाला: मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र को दिया दो महीने का अल्टीमेटम, दो IAS अधिकारियों पर अभियोजन की मंजूरी का मामला
मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के एक हाई-प्रोफाइल टेंडर अनियमितता मामले में केंद्र सरकार को दो महीने के भीतर निर्णायक कदम उठाने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि दो वरिष्ठ आईएएस…
मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के एक हाई-प्रोफाइल टेंडर अनियमितता मामले में केंद्र सरकार को दो महीने के भीतर निर्णायक कदम उठाने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने की प्रक्रिया इस अवधि में पूरी कर ली जानी चाहिए। यह मामला पूर्व AIADMK मंत्री एस.पी. वेलुमणि से जुड़ा है, जिसमें लगभग 98.25 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है।
न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश ने यह निर्देश एक अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह याचिका 'अरप्पोर इयक्कम' नामक संगठन ने दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) अदालत के पिछले आदेश का पालन नहीं कर रहा है, जिसमें मामले में चार्जशीट दाखिल करने को कहा गया था।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला पूर्ववर्ती AIADMK सरकार के कार्यकाल का है। आरोप है कि जब एस.पी. वेलुमणि मंत्री थे, तब चेन्नई और कोयंबटूर नगर निगमों में टेंडर देने में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ की गईं। इन कथित अनियमितताओं की कुल राशि लगभग 98.25 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसी मामले की जांच में दो आईएएस अधिकारियों की भूमिका भी सामने आई, जिन पर मुकदमा चलाने के लिए केंद्र की मंजूरी आवश्यक है।
देरी पर अदालत ने जताई नाराज़गी
बुधवार को हुई सुनवाई में अदालत ने देरी पर सवाल उठाए। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के संयुक्त सचिव सुशील कुमार पाटिल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। उन्होंने बताया कि मामले से जुड़े दस्तावेजों की संख्या बहुत अधिक है और उनकी जांच में समय लग रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि दस्तावेज़ केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) को भेजे गए हैं और वहां से रिपोर्ट आने के बाद इसे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजा जाएगा, जो अभियोजन की मंजूरी पर अंतिम निर्णय लेगा।
केंद्र के अधिकारी ने प्रक्रिया पूरी करने के लिए दो महीने का समय मांगा और आश्वासन दिया कि इसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। अदालत ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार करते हुए केंद्र को नवंबर 2025 से अब तक उठाए गए कदमों का ब्यौरा देते हुए एक हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया। इस मामले पर अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।
इनपुट: IANS



