सूरत फूड पॉइजनिंग मामला: गुजरात में 386 हॉस्टलों-कैंटीनों की जांच, 2 के लाइसेंस निलंबित
गुजरात में हाल ही में सूरत के एक स्कूल हॉस्टल में हुई फूड पॉइजनिंग की घटना के बाद राज्य सरकार ने खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़े पैमाने पर अभियान छेड़ दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस…
गुजरात में हाल ही में सूरत के एक स्कूल हॉस्टल में हुई फूड पॉइजनिंग की घटना के बाद राज्य सरकार ने खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़े पैमाने पर अभियान छेड़ दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अभियान के तहत अब तक राज्य भर के 386 हॉस्टलों और कैंटीनों का औचक निरीक्षण किया जा चुका है, जिसमें कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।
यह कार्रवाई 13 सितंबर को सूरत के पीपी सवानी इंटरनेशनल स्कूल में हुई घटना के बाद शुरू की गई। वहां रात के खाने के बाद करीब 85 छात्रों ने पेट दर्द और उल्टी की शिकायत की थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। उस दिन खाने में पनीर-मटर, रोटी, फ्राइड राइस और छाछ परोसी गई थी। अधिकारियों के अनुसार, बीमारी का सटीक कारण अभी तक साबित नहीं हुआ है और जांच जारी है।
जांच में मिलीं गंभीर खामियां
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जांचे गए 386 संस्थानों में 100 सरकारी, 71 अर्द्ध-सरकारी और 213 निजी हॉस्टल व कैंटीन शामिल हैं। जांच के दौरान कई रसोइयों में अत्यधिक गंदगी और अस्वच्छ हालात पाए गए। इस आधार पर 102 संस्थानों को सुधार नोटिस जारी किया गया है, जबकि दो के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं, 18 हॉस्टलों ने सफाई और व्यवस्था सुधारने के लिए खुद ही अस्थायी तौर पर अपना संचालन बंद कर दिया।
स्वास्थ्य मंत्री की कड़ी चेतावनी
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, "जब हॉस्टलों में फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाएं होती हैं तो इसकी पूरी जिम्मेदारी हॉस्टल प्रबंधन की होती है। ऐसी घटनाएं गंभीर लापरवाही के कारण सामने आती हैं।" उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लापरवाही से छात्रों की सेहत से खिलवाड़ हुआ तो संबंधित लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी। मंत्री ने यह भी बताया कि जांच के बाद करीब 200 हॉस्टलों ने अपनी रसोइयों में सफाई करवाई है और जल्द ही निरीक्षण का दूसरा दौर भी शुरू किया जाएगा।
इनपुट: IANS



