EPFO की कवरेज सीमा बढ़कर ₹25,000 हुई, 51 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को मिलेगा फायदा
केंद्र सरकार ने देश के लाखों कर्मचारियों को एक बड़ी सामाजिक सुरक्षा की सौगात दी है। अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन की सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी गई…
केंद्र सरकार ने देश के लाखों कर्मचारियों को एक बड़ी सामाजिक सुरक्षा की सौगात दी है। अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन की सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दी गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को भविष्य निधि (PF), पेंशन और बीमा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसे श्रमिकों के लिए एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवच बताया, जो रोजगार के औपचारिकीकरण को भी गति देगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह महत्वपूर्ण फैसला विश्वकर्मा जयंती और सेवा दिवस के शुभ अवसर से लागू होगा।
क्या है इस बदलाव का मतलब?
अब तक, अगर कोई नया कर्मचारी ₹15,000 प्रति माह से अधिक वेतन पर नौकरी शुरू करता था, तो वह स्वतः EPFO के दायरे में नहीं आता था। इस वजह से एक बड़ी संख्या में कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा लाभों से वंचित रह जाते थे। सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में देश में वेतन स्तर और आय में लगातार वृद्धि हुई है, और कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी भी इस पुरानी सीमा के करीब पहुंच गई थी। इसलिए, इस बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
नई व्यवस्था के तहत, ₹15,000 से ₹25,000 मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारी भी अनिवार्य रूप से EPFO का हिस्सा बनेंगे। इस कदम से न केवल कर्मचारियों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि औपचारिक रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
तीन बड़े फायदे और पिछला बदलाव
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस फैसले से कर्मचारियों को तीन प्रमुख लाभ मिलेंगे:
- कर्मचारी भविष्य निधि (EPF): नियमित बचत का अवसर।
- कर्मचारी पेंशन योजना (EPS): सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन सुरक्षा।
- कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना (EDLI): परिवार के लिए बीमा कवर।
गौरतलब है कि EPFO की वेतन सीमा में पिछली बार बढ़ोतरी सितंबर 2014 में की गई थी, जब इसे ₹15,000 किया गया था। उससे पहले, 2004 से 2014 तक यह 10 वर्षों तक अपरिवर्तित रही थी। अब लगभग 12 साल बाद सरकार ने इसे मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाने का फैसला किया है।
इनपुट: IANS



