UPI पर चार्ज: ₹2000 से ऊपर के कुछ कमर्शियल पेमेंट पर शुल्क का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में
भारत में डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर लगने वाले एक नए शुल्क को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस छिड़ गई है। ₹2000 से अधिक के कुछ विशेष कमर्शियल UPI भुगतानों पर शुल्क…
भारत में डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर लगने वाले एक नए शुल्क को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस छिड़ गई है। ₹2000 से अधिक के कुछ विशेष कमर्शियल UPI भुगतानों पर शुल्क लगाने के केंद्र सरकार के फैसले को अब देश की सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी गई है। याचिका में इस शुल्क को असंवैधानिक बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है।
समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, वकील अंजन दत्ता द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि सरकार ने यह निर्णय बिना किसी ठोस कानूनी आधार और व्यापक जनहित पर विचार किए बिना लिया है। याचिकाकर्ता ने 14 दिसंबर को जारी संबंधित अधिसूचना और 15 सितंबर को लागू हुए एमडीआर फ्रेमवर्क, दोनों को निरस्त करने का आग्रह किया है।
क्या है याचिका का आधार?
याचिका में तर्क दिया गया है कि UPI को देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और लोगों को कम लागत वाली भुगतान सुविधा देने के मकसद से विकसित किया गया था। ऐसे में इस पर अतिरिक्त शुल्क लगाना सरकार की डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने की अपनी ही नीति के खिलाफ जाता है। याचिका में 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू करने के इस कदम को आम नागरिकों पर पड़ने वाले असर के रूप में भी देखा गया है।
शुल्क पर राजनीतिक घमासान
यह मामला सिर्फ अदालत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इस पर राजनीतिक दलों के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि इस शुल्क का अंतिम बोझ आम जनता पर ही पड़ेगा।
वहीं, सरकार की ओर से भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने इस फैसले का बचाव किया है। उन्होंने कांग्रेस पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा, "पूरी रिपोर्ट का गंभीरता से अध्ययन किया जाना चाहिए।" ठाकुर ने स्पष्ट किया कि ₹2000 तक के लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं है और इससे अधिक के भी अधिकांश लेनदेन शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे। उन्होंने भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की सफलता पर जोर देते हुए कहा, "भारत के डिजिटल ट्रांजेक्शन मॉडल की दुनिया भर में चर्चा होती है। बड़े देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भारत आकर देखते हैं कि कैसे चाय बेचने वाला, सड़क किनारे का विक्रेता और छोटे व्यापारी आसानी से डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहे हैं।"
इनपुट: IANS



