सेमीकंडक्टर हब बनने की राह पर भारत, PM मोदी बोले- 'भारत की चिप्स दुनिया भर में जाएंगी'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग के उज्ज्वल भविष्य पर भरोसा जताते हुए कहा है कि देश में बनी चिप्स जल्द ही दुनिया भर में निर्यात की जाएंगी। सेमीकॉन इंडिया 2026 के उद्घाटन के…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग के उज्ज्वल भविष्य पर भरोसा जताते हुए कहा है कि देश में बनी चिप्स जल्द ही दुनिया भर में निर्यात की जाएंगी। सेमीकॉन इंडिया 2026 के उद्घाटन के मौके पर उन्होंने यह बात कही। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पीएम मोदी ने इस दौरान वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि और अन्य क्षेत्रों में हुई प्रगति पर भी प्रकाश डाला।
पीएम मोदी ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की मजबूत विकास दर हासिल की है, जो वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण माहौल को देखते हुए एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने हाल की कई महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते वैश्विक भरोसे को रेखांकित किया। इसमें एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी द्वारा भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार और हाल ही में भारत की अध्यक्षता में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 'नई दिल्ली घोषणापत्र' पर बनी आम सहमति शामिल है।
सेमीकॉन 2.0: भारत का चिप इकोसिस्टम
इस अवसर पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 'सेमीकॉन 2.0' कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, जिनका लक्ष्य भारत में एक संपूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण करना है। ये स्तंभ हैं- चिप डिजाइन, मशीन और कच्चा माल, फैब्रिकेशन (फैब्स), एडवांस्ड पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और प्रतिभा विकास (टैलेंट)।
वैष्णव ने बताया कि सरकार का लक्ष्य सेमीकॉन 2.0 के तहत कम से कम 200 चिप-डिजाइन स्टार्टअप और कंपनियों को सहयोग देना है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कार्यक्रम के पहले चरण में 105 से ज्यादा स्टार्टअप्स ने भाग लिया था, जिनमें से लगभग 20 स्टार्टअप्स करीब 800 करोड़ रुपए की वेंचर कैपिटल फंडिंग जुटाने में सफल रहे।
बुनियादी ढाँचा और प्रतिभा विकास
प्रधानमंत्री मोदी ने देश में लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने में लगभग 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के चालू होने के महत्व को भी बताया। उन्होंने कहा कि यह कॉरिडोर देश भर में माल की आवाजाही को तेज करेगा। इसके अलावा, आईटी मंत्री वैष्णव ने बताया कि भारत ने सिर्फ चार सालों में 70,000 डिजाइन इंजीनियर तैयार कर लिए हैं, जबकि शुरुआती लक्ष्य 10 वर्षों में 85,000 इंजीनियर तैयार करने का था। उन्होंने कहा कि अब देश की 400 से ज्यादा यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स उपलब्ध हैं।
इनपुट: IANS



