शुक्रवार, 25 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
स्वास्थ्य

आयुष्मान भारत योजना ने पूरे किए 8 साल, अब तक 13 करोड़ से ज़्यादा मरीज़ों को मिला 5 लाख तक का मुफ़्त इलाज

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY), ने पिछले 8 सालों में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। इस योजना के तहत अब तक 13 करोड़ से ज़्यादा लोगों…

आयुष्मान भारत योजना ने पूरे किए 8 साल, अब तक 13 करोड़ से ज़्यादा मरीज़ों को मिला 5 लाख तक का मुफ़्त इलाज
(फोटो: IANS)

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY), ने पिछले 8 सालों में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। इस योजना के तहत अब तक 13 करोड़ से ज़्यादा लोगों को मुफ़्त इलाज मिल चुका है, जिससे गरीब परिवारों पर पड़ने वाले स्वास्थ्य खर्च के बोझ में बड़ी राहत मिली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में इलाज पर 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च हुई है।

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राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के सीईओ सुनील कुमार बरनवाल ने बताया कि यह योजना अब तक 48 करोड़ से ज़्यादा लोगों के लिए आयुष्मान कार्ड जारी कर चुकी है। यह कार्ड हर पात्र परिवार को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की गारंटी देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना में लगभग 2000 तरह की चिकित्सा प्रक्रियाएं शामिल हैं।

योजना की पारदर्शिता और धोखाधड़ी की रोकथाम

बरनवाल ने योजना के कामकाज के तरीके पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इलाज का पैकेज एक 'बंडल पैकेज' होता है, जिसमें प्रक्रिया, दवाएं और अन्य उपभोग्य सामग्रियों (consumables) का खर्च शामिल होता है। उन्होंने कहा, "अलग से इस्तेमाल होने वाली चीजों के लिए अलग से भुगतान नहीं किया जाता और न ही कोई अलग रेट तय है।" हालांकि, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, क्लेम के दौरान इस्तेमाल हुए इम्प्लांट की पूरी जानकारी, बिल और बारकोड के साथ ली जाती है।

धोखाधड़ी को रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। सुनील कुमार बरनवाल के मुताबिक, "आईटी सिस्टम यह भी जांचता है कि यदि एक से ज्यादा इम्प्लांट का इस्तेमाल हुआ है तो उसे संदिग्ध मानकर आगे की प्रक्रिया शुरू की जाती है।"

"भारत में बनी वस्तुएं सस्ती, पर खराब नहीं"

योजना में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता पर बात करते हुए NHA के सीईओ ने कहा, "भारत में बनी वस्तुओं की कीमत कम हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उनकी गुणवत्ता खराब है।" उन्होंने यह भी बताया कि अभी भी बड़े पैमाने पर कार्ड बनाने का काम जारी है, क्योंकि इस योजना के दायरे में 7 करोड़ से ज़्यादा और लोग आने वाले हैं। उन्होंने इस कार्ड को 'स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी' बताया।

इनपुट: IANS

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News4Social हेल्थ डेस्क

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