राम मंदिर दान-चढ़ावा विवाद: CM योगी बोले- 'दूध का दूध, पानी का पानी होगा'
अयोध्या में राम मंदिर के दान और चढ़ावे में कथित गबन का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर SIT जांच बैठाई गई है। CM योगी आदित्यनाथ ने 19 जून 2026 को रुदौली की जनसभा में लोगों से 15 दिन इंतजार और बेवजह बयानबाजी न करने की अपील की, और कहा कि दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के दान और चढ़ावे में कथित गबन के मामले ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। इसी विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 जून 2026 (शुक्रवार) को अयोध्या के रुदौली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए साफ कहा कि मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है और जल्द ही 'दूध का दूध और पानी का पानी' होगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राम मंदिर में दान और चढ़ावे के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर ही SIT का गठन किया गया। CM योगी ने इस तथ्य को दोहराते हुए कहा कि जांच ट्रस्ट की पहल पर बैठाई गई है, ताकि पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ सके।
15 दिन का इंतजार, बयानबाजी से परहेज की अपील
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि जांच पूरी होने तक बेवजह की बयानबाजी से बचें। उनका कहना था कि SIT को रिपोर्ट सौंपने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है, इसलिए तब तक धैर्य रखा जाए। योगी ने भरोसा दिलाया कि अगर इस पूरे मामले में कोई दोषी पाया जाता है, तो उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
CM योगी ने जनता से यह भी अनुरोध किया कि अगर किसी के पास इस कथित गबन से जुड़ा कोई दस्तावेजी सबूत है, तो वह उसे सीधे SIT को सौंप दे। साथ ही उन्होंने आगाह किया कि अयोध्या को बदनाम करने वाली ताकतों के बहकावे में न आएं।
SIT जांच की प्रक्रिया
- राम मंदिर में दान और चढ़ावे के कथित गबन का मामला सामने आया।
- ट्रस्ट के अनुरोध पर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
- SIT द्वारा जांच फिलहाल जारी है।
- SIT को 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
विपक्ष पर सीधा निशाना
रुदौली की इस सभा में मुख्यमंत्री ने राम मंदिर आंदोलन को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उनका दावा था कि राम मंदिर आंदोलन का विरोध करने के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जिम्मेदार रहीं। योगी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने राम भक्तों और कार सेवकों के खिलाफ काम किया।
CM ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय में यहां तक कह दिया था कि 'राम हुए ही नहीं'। उनके अनुसार, अयोध्या में राम मंदिर न बनने देने के लिए कांग्रेस ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया था। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वीरांगना झलकारी बाई को श्रद्धांजलि भी दी।
आगे क्या
अब सभी की निगाहें SIT की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय समयसीमा के भीतर सौंपी जानी है। मुख्यमंत्री के बयान से साफ है कि सरकार इस मामले को जांच के दायरे में रखते हुए ही आगे बढ़ना चाहती है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है। फिलहाल यह तय करना SIT के हाथ में है कि कथित गबन में किसकी क्या भूमिका रही।



