शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश

SSC भर्ती परीक्षा में हाई-टेक धांधली: UP STF ने राजस्थान से दबोचा नेटवर्क का मास्टरमाइंड

कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की भर्ती परीक्षा में सेंध लगाने वाले एक हाई-टेक गिरोह के खिलाफ उत्तर प्रदेश STF को बड़ी कामयाबी मिली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, STF ने इस गिरोह के एक प्रमुख…

SSC भर्ती परीक्षा में हाई-टेक धांधली: UP STF ने राजस्थान से दबोचा नेटवर्क का मास्टरमाइंड
(फोटो: IANS)

कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की भर्ती परीक्षा में सेंध लगाने वाले एक हाई-टेक गिरोह के खिलाफ उत्तर प्रदेश STF को बड़ी कामयाबी मिली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, STF ने इस गिरोह के एक प्रमुख सदस्य लोकेश को राजस्थान के अलवर से गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से फरार चल रहा था। लोकेश पर परीक्षा में इस्तेमाल होने वाले विशेष इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने और सप्लाई करने का आरोप है।

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यह पूरा मामला इस साल 22 मई को तब सामने आया था, जब ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र में स्थित एक परीक्षा केंद्र पर छापा मारा गया था। तब STF ने गिरोह के सरगना और सेंटर संचालक प्रदीप चौहान समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से करीब 50 लाख रुपये नकद और प्रॉक्सी सर्वर जैसे उपकरण भी बरामद हुए थे।

कैसे काम करता था यह हाई-टेक गिरोह?

जांच में पता चला है कि यह गिरोह बेहद आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर धांधली को अंजाम देता था। आरोपी लोकेश सामान्य दिखने वाली TFT स्क्रीन को मॉडिफाई करता था। इन स्क्रीनों में रास्पबेरी पाई और खास नेटवर्किंग उपकरण फिट किए जाते थे। IANS के मुताबिक, परीक्षा के दौरान इन उपकरणों की मदद से प्रश्नपत्र को केंद्र के बाहर बैठे सॉल्वर तक लाइव भेज दिया जाता था। सॉल्वर सवालों को हल कर वापस अभ्यर्थी तक उत्तर पहुंचा देते थे। गिरोह ऐसे उन्नत राउटर और डोंगल का इस्तेमाल करता था, जो परीक्षा केंद्रों में लगे जैमर को भी चकमा दे देते थे।

अलवर से हुई गिरफ्तारी और बड़ी बरामदगी

मामले की जांच के दौरान 16 जुलाई को जेल में बंद आरोपियों से पूछताछ में लोकेश की भूमिका का खुलासा हुआ। इसके बाद से ही STF उसकी तलाश में थी। 30 जुलाई 2026 को गौतमबुद्धनगर STF की टीम ने राजस्थान के अलवर में कार्रवाई करते हुए लोकेश पुत्र लालाराम को गिरफ्तार कर लिया।

उसकी निशानदेही पर उसके घर से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद हुआ है, जिसमें शामिल हैं:

  • 92 मॉडिफाइड TFT स्क्रीन
  • 14 रास्पबेरी पाई डिवाइस
  • 45 वीजीए कार्ड
  • एक लैपटॉप और कई अन्य नेटवर्किंग उपकरण

कौन है आरोपी लोकेश?

पूछताछ में लोकेश ने बताया कि वह बीए पास है और 2013 से कंप्यूटर हार्डवेयर का काम कर रहा था। एक मॉडिफाइड स्क्रीन तैयार करने में करीब 40 हजार रुपये की लागत आती थी, और वह हर स्क्रीन को मॉडिफाई करने के लिए लगभग 5 हजार रुपये अलग से लेता था। उसने यह तकनीक 2017 में सीखी और उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान व महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में ऐसे उपकरण सप्लाई करने लगा। STF अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।

इनपुट: IANS

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News4Social उत्तर प्रदेश डेस्क

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