दिल्ली दंगा: IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन को उम्रकैद, भाजपा ने की मौत की सज़ा की मांग
2020 के दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट…
2020 के दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने छह साल बाद इस चर्चित मामले में अपना फैसला सुनाया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अदालत ने हुसैन को मुख्य दोषी मानते हुए आजीवन कारावास के साथ पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
इस मामले में ताहिर हुसैन के चार अन्य साथियों को भी उम्रकैद की सजा दी गई है, जिन पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई नेताओं ने इसे न्याय की जीत बताते हुए दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की है।
पुलिस और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस सुरेंद्र कुमार ने IANS को बताया कि अंकित शर्मा की हत्या ताहिर हुसैन के घर के सामने की गई थी और उनके शव को नाले में फेंकने का प्रयास किया गया था। उन्होंने कहा कि 13 जुलाई को दोषियों को दोषी ठहराए जाने के बाद अब सजा सुनाकर कानूनी प्रक्रिया पूरी हो गई है।
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा, "आज के फैसले ने न्याय में हमारा भरोसा और मजबूत किया है। हम इस फैसले का स्वागत करते हैं।" उन्होंने ताहिर हुसैन को दंगों का "मास्टरमाइंड" बताते हुए उम्मीद जताई कि इस उम्रकैद की सजा को आगे चलकर मौत की सजा में बदला जाएगा।
दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा और आशीष सूद ने भी फैसले का स्वागत किया। कपिल मिश्रा ने कहा, "यह न्याय की शुरुआत है।" उन्होंने आरोप लगाया कि ताहिर हुसैन ने बम और पत्थर जमा किए थे और अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या की गई। वहीं, आशीष सूद ने आम आदमी पार्टी पर वोट बैंक की राजनीति के लिए ताहिर हुसैन को बचाने का आरोप लगाया।
अन्य दलों का नजरिया
इस फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। मौलाना साजिद रशीदी ने दंगों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ताहिर हुसैन एक अच्छे इंसान हैं और घटना के दिन उन्होंने फोन कर खुद के घिरे होने और पुलिस से मदद न मिलने की बात कही थी।
समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने दिल्ली दंगों की जांच हाई कोर्ट के जज से कराने की मांग की थी, जिसे तत्कालीन केंद्र सरकार ने नहीं माना था।
इनपुट: IANS



