खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे राज्यपाल हसनैन और MOS मार्गेरिटा, 4 जुलाई से शुरू होगा कार्यक्रम
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन के करीब 130 दिन बाद उनका अंतिम संस्कार 4 जुलाई, 2026 से शुरू होगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन के करीब 130 दिन बाद उनका अंतिम संस्कार 4 जुलाई, 2026 से शुरू होगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शामिल होंगे।
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट किया गया है कि राज्यपाल हसनैन और MOS मार्गेरिटा जनाजे की नमाज़ एवं दफनाने की रस्मों में भारत का आधिकारिक प्रतिनिधित्व करेंगे। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इन समारोहों में व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया था।
तीन शहरों में होंगे समारोह, 9 जुलाई को होगा दफन
ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, यह पूरा कार्यक्रम 4 से 9 जुलाई, 2026 तक चलेगा और तीन प्रमुख शहरों — तेहरान, कोम और मशहद — में आयोजित किया जाएगा। खामेनेई की स्मृति में गठित आधिकारिक समिति के बयान के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर पहले 4 और 5 जुलाई को तेहरान के मोसल्ला में सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद 7 जुलाई को कोम में एक विशेष समारोह होगा। अंततः 9 जुलाई को मशहद में आठवें शिया इमाम की दरगाह में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा, जिसके बाद ईरान के इस दूसरे सबसे बड़े शहर में भी समारोह आयोजित होंगे।
28 फरवरी के हमले में हुई थी मृत्यु
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमले में अयातुल्लाह अली खामेनेई तथा उनके परिवार के कुछ सदस्यों की मौत हो गई थी। खामेनेई ने 1989 में अयातुल्लाह रूहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद सुप्रीम लीडर का पद संभाला था। उल्लेखनीय है कि अयातुल्लाह खुमैनी ने 1979 की इस्लामिक क्रांति का नेतृत्व किया था, जिसने शाह मोहम्मद रजा पहलवी की राजशाही को समाप्त कर ईरान में इस्लामिक गणराज्य की स्थापना की थी।
खामेनेई की विरासत और उनके उत्तराधिकार पर चुप्पी
जहाँ खुमैनी इस क्रांति की वैचारिक और राजनीतिक धुरी थे, वहीं अली खामेनेई ने सुप्रीम लीडर बनने के बाद ईरान की राजनीतिक व्यवस्था, सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड जैसी संस्थाओं को संगठित एवं सुदृढ़ किया। उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई फिलहाल किसी भी आधिकारिक राजनीतिक या संवैधानिक पद पर नहीं हैं। उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर जो अटकलें सामने आई हैं, उनकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इनपुट: IANS



