शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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असम की नौगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव: भाजपा ने देबाशीष शर्मा को मैदान में उतारा

असम की नौगांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने इस सीट से देबाशीष शर्मा को टिकट देने का फैसला…

असम की नौगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव: भाजपा ने देबाशीष शर्मा को मैदान में उतारा
(फोटो: IANS)

असम की नौगांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने इस सीट से देबाशीष शर्मा को टिकट देने का फैसला किया है। यह उपचुनाव कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद जरूरी हो गया था, जो अब खुद भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 7 सितंबर को इस उपचुनाव की तारीखों की घोषणा की थी। इसके तहत, असम की इस संसदीय सीट के साथ-साथ चार अन्य राज्यों की पांच विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा और नतीजों की घोषणा 9 अक्टूबर को की जाएगी।

क्यों हो रहा है उपचुनाव?

नौगांव संसदीय सीट कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे की वजह से खाली हुई थी। उन्होंने 17 मार्च को न केवल सांसद पद छोड़ा, बल्कि कांग्रेस पार्टी से भी अपना नाता तोड़ लिया। बोरदोलोई 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में इसी सीट से सांसद चुने गए थे। 2024 के चुनाव में उन्हें 7,88,850 वोट मिले थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी, भाजपा के सुरेश बोरा को 5,76,619 वोट प्राप्त हुए थे।

बोरदोलोई ने क्यों छोड़ी थी कांग्रेस?

इस्तीफा देने के बाद 19 सितंबर को प्रद्युत बोरदोलोई ने IANS से बातचीत में कहा था कि उनका कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया था। उन्होंने इसे पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे असंतोष का परिणाम बताया था। बोरदोलोई ने कहा था, “यह एक लंबी कहानी है। ऐसा नहीं है कि मैंने अचानक कोई जल्दबाजी में फैसला लिया हो। कई घटनाएं हुई और किसी तरह मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि पार्टी के दायरे में वह अपनापन या भाईचारा नहीं रहा।”

उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए आगे कहा, “मैं असल में कुछ मुद्दों पर चर्चा करना चाहता था, और फिर हालात तब और बिगड़ गए जब पीसीसी नेतृत्व ने भी नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। मैंने पाया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच भरोसे की कमी है। ऐसे घुटन भरे माहौल में, मुझे लगा कि मैं कोई सार्थक भूमिका नहीं निभा सकता।”

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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