शनिवार, 8 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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रूसी तेल पर अमेरिकी टैक्स बिल: भारत के निर्यात और व्यापारिक रिश्तों के लिए क्या हैं इसके मायने?

अमेरिकी सीनेट से एक ऐसा बिल पारित हुआ है जो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैक्स लगाने का प्रावधान करता है। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में विदेशी मामलों के विशेषज्ञ महेश सचदेव ने इस बिल को…

रूसी तेल पर अमेरिकी टैक्स बिल: भारत के निर्यात और व्यापारिक रिश्तों के लिए क्या हैं इसके मायने?
(फोटो: IANS)

अमेरिकी सीनेट से एक ऐसा बिल पारित हुआ है जो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैक्स लगाने का प्रावधान करता है। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में विदेशी मामलों के विशेषज्ञ महेश सचदेव ने इस बिल को भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बताया है। उनका मानना है कि अगर यह बिल कानून बन जाता है तो भारत की निर्यात मुहिम को झटका लग सकता है और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों में अनिश्चितता पैदा हो सकती है।

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यह बिल, जिसे 'लींडसे ग्राहम बिल' के नाम से जाना जाता है, अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में भेजा गया है। वहां से पारित होने और राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद यह कानून का रूप ले लेगा। विशेषज्ञ सचदेव के मुताबिक, इस प्रक्रिया में कोई बड़ी बाधा आने की आशंका नहीं है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि इसमें बाधा नहीं होगी। अमेरिका के जनमानस में ये बात घर कर गई है कि रूस यूक्रेन के लिए और ईरान, अमेरिका के साथ युद्ध के लिए जिम्मेदार है।”

भारत पर क्या होगा असर?

इस बिल में रूसी तेल के पाँच बड़े आयातकों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रावधान है। विशेषज्ञ के अनुसार, इससे भारत के निर्यातकों और आयातकों, दोनों को अनिश्चय का सामना करना पड़ेगा और खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल भी रूस से तेल-गैस आयात करने पर भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था, जिसके बावजूद निर्यात में मामूली वृद्धि हुई थी। यह स्थिति भारत के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के बीच एक व्यापारिक समझौता अपने अंतिम चरण में है।

आगे की राह और विकल्प

महेश सचदेव ने सुझाव दिया कि भारत को रूस से तेल आयात करने के अपने फैसले पर गंभीरता से विचार करना होगा। उन्होंने कहा, “इस समय तेल के बाजार में गिरावट आई है। संभावना है कि होर्मुज खुलेगा तो तेल का प्रवाह बढ़ेगा और दाम नीचे गिर जाएंगे तो ऐसी हालत में भारत को रूस से तेल नहीं खरीदना पड़ेगा।” भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, इसलिए उसके किसी भी फैसले का वैश्विक बाजार पर असर पड़ता है। विशेषज्ञ ने यह भी बताया कि इस बिल में चीन पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया है, क्योंकि अमेरिका को डर है कि चीन जवाबी कार्रवाई में रेयर अर्थ मटीरियल्स की सप्लाई रोक सकता है।

इनपुट: IANS

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