शनिवार, 8 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारत के समुद्री क्षेत्र में डिजिटल क्रांति: नाविकों और कंपनियों के लिए 'ई-समुद्र' प्लेटफॉर्म लॉन्च

भारत के समुद्री क्षेत्र को आधुनिक बनाने और नाविकों के कल्याण को प्राथमिकता देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को 'ई-समुद्र' नाम का…

भारत के समुद्री क्षेत्र में डिजिटल क्रांति: नाविकों और कंपनियों के लिए 'ई-समुद्र' प्लेटफॉर्म लॉन्च
(फोटो: IANS)

भारत के समुद्री क्षेत्र को आधुनिक बनाने और नाविकों के कल्याण को प्राथमिकता देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को 'ई-समुद्र' नाम का एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया, जिसका मकसद समुद्री प्रशासन से जुड़ी सभी सेवाओं को एक ही जगह पर ऑनलाइन उपलब्ध कराना है।

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इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए नाविकों, शिपिंग कंपनियों, बंदरगाहों और समुद्री उद्योग से जुड़े अन्य सभी हितधारकों को सरकारी दफ़्तरों के चक्कर लगाने के बजाय ऑनलाइन ही सारी सुविधाएं मिलेंगी। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस प्लेटफॉर्म का उद्घाटन करते हुए कहा कि सरकार की समुद्री विकास रणनीति के केंद्र में हमेशा नाविक रहेंगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "हर भारतीय नाविक सुरक्षित, सम्मानित और संरक्षित होना चाहिए। यही हमारी प्राथमिकता है।"

क्या बदलेगा 'ई-समुद्र' से?

यह प्लेटफॉर्म समुद्री सेवाओं के लिए एक 'सिंगल डिजिटल विंडो' की तरह काम करेगा। पोत परिवहन मंत्रालय के सचिव विजय कुमार ने बताया कि इसके माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करने, डिजिटल भुगतान करने, आवेदन की स्थिति को रियल-टाइम में ट्रैक करने और डिजिटल प्रमाणपत्र प्राप्त करने जैसी तमाम सुविधाएं मिलेंगी। महासागरीय प्रशासन के महानिदेशक श्याम जगन्नाथन के अनुसार, 'ई-समुद्र' पारंपरिक दफ़्तरी कामकाज को खत्म कर एक 'डिजिटल-फर्स्ट' और 'फेसलेस' यानी बिना कार्यालय जाए काम करने वाली व्यवस्था की नींव रखेगा। इससे सेवाओं की डिलीवरी तेज होगी और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

भारत की बढ़ती समुद्री ताकत

इस डिजिटल पहल की ज़रूरत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि भारत में नाविकों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2013 में देश में लगभग 1.03 लाख सक्रिय नाविक थे, जिनकी संख्या 2025 तक बढ़कर 3.23 लाख से ज़्यादा हो गई है। सर्बानंद सोनोवाल ने विश्वास जताया कि भारत आज दुनिया में नाविकों की आपूर्ति करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है और जल्द ही पहले स्थान पर पहुंच सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार भारत को दुनिया के शीर्ष पांच जहाज निर्माण देशों में शामिल करने के लिए काम कर रही है, जबकि देश पहले से ही विश्व का अग्रणी शिप रीसाइक्लिंग हब है।

नाविकों की सुरक्षा प्राथमिकता

सरकार ने बताया कि हाल के भू-राजनीतिक तनावों के बीच भी भारतीय समुद्री प्रशासन ने वैश्विक शिपिंग गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखी। इस दौरान 16,000 से ज़्यादा कॉल्स की निगरानी और 40,000 से ज़्यादा संचार गतिविधियों का प्रबंधन किया गया। विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों और नौसेना के सहयोग से संकटग्रस्त क्षेत्रों में फंसे 4,000 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस भी लाया गया। यह नई डिजिटल पहल सरकार के 'मैरीटाइम इंडिया विजन 2030' और 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' का हिस्सा है।

इनपुट: IANS

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