शनिवार, 8 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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जापान: कुमामोटो भूकंप में मरने वालों की संख्या 39 हुई, 6500 से ज़्यादा लोग राहत शिविरों में

जापान के दक्षिण-पश्चिमी कुमामोटो प्रांत में 28 जुलाई को आए शक्तिशाली भूकंप के बाद मरने वालों का आँकड़ा बढ़कर 39 हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, प्रांतीय सरकार ने शनिवार को यह…

जापान: कुमामोटो भूकंप में मरने वालों की संख्या 39 हुई, 6500 से ज़्यादा लोग राहत शिविरों में
(फोटो: IANS)

जापान के दक्षिण-पश्चिमी कुमामोटो प्रांत में 28 जुलाई को आए शक्तिशाली भूकंप के बाद मरने वालों का आँकड़ा बढ़कर 39 हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, प्रांतीय सरकार ने शनिवार को यह जानकारी दी और बताया कि 6,500 से अधिक लोग अभी भी राहत और निकासी केंद्रों में शरण लिए हुए हैं।

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अधिकारियों ने बताया कि कुल 39 मौतों में से 36 लोगों की जान सीधे तौर पर 7.1 तीव्रता के भूकंप के कारण गई। एक अन्य व्यक्ति की मौत लू लगने से हुई, जिसे आपदा से जुड़ा माना जा रहा है। इसके अलावा, दो अन्य मौतों के कारणों और भूकंप से उनके संबंध की जाँच की जा रही है। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक, इस आपदा में अब तक कुल 205 लोग हताहत हुए हैं, जिनमें 23 लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

सरकार का राहत और पुनर्वास का आश्वासन

सोमवार को प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने भूकंप प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों का जायजा लिया। क्योडो न्यूज एजेंसी के अनुसार, उन्होंने प्रभावित लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “सरकार वह सब कुछ करेगी जो वह कर सकती है।” आपदा प्रतिक्रिया की वर्दी पहने प्रधानमंत्री ने हिकावा शहर में एक निकासी केंद्र का दौरा किया और वहाँ रह रहे लोगों से मुलाकात की।

इसके बाद उन्होंने हेलीकॉप्टर से काशिमा शहर के एयॉन शॉपिंग मॉल और यत्सुशिरो स्थित एक पेपर प्लांट का हवाई निरीक्षण किया। इन दो स्थानों पर भूकंप के बाद हुए हादसों में क्रमशः सात और नौ लोगों की जान गई थी।

भूकंप की तीव्रता और तबाही

भूकंप के केंद्र के सबसे करीब के इलाकों में इसकी तीव्रता जापान के भूकंपीय पैमाने पर अधिकतम 7 दर्ज की गई थी। यह इस पैमाने का उच्चतम स्तर है, जहाँ झटकों की वजह से लोगों के लिए खड़ा रहना या चलना भी मुश्किल हो जाता है। 28 जुलाई को सार्वजनिक प्रसारक एनएचके द्वारा जारी हवाई फुटेज में इमारतों को हुए भारी नुकसान की तस्वीरें सामने आई थीं, जिसमें कई इमारतें ढह गई थीं और उनका ढाँचा तक दिखने लगा था। अधिकारियों के लिए अब प्रभावित लोगों को सुरक्षित आश्रय देना और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे को फिर से बहाल करना एक बड़ी चुनौती है।

इनपुट: IANS

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