मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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अमेठी में बनी AK-203 'शेर' राइफलें जल्द भारतीय सेना को मिलेंगी, 2031 तक पूरी होगी सप्लाई

भारतीय सेना की मारक क्षमता में जल्द ही बड़ा इज़ाफ़ा होने वाला है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के अमेठी में बनी स्वदेशी AK-203 असॉल्ट राइफलों की पहली खेप डिलीवरी के लिए लगभग तैयार है। 'शेर' नाम की इस आधुनिक…

अमेठी में बनी AK-203 'शेर' राइफलें जल्द भारतीय सेना को मिलेंगी, 2031 तक पूरी होगी सप्लाई
(फोटो: IANS)

भारतीय सेना की मारक क्षमता में जल्द ही बड़ा इज़ाफ़ा होने वाला है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के अमेठी में बनी स्वदेशी AK-203 असॉल्ट राइफलों की पहली खेप डिलीवरी के लिए लगभग तैयार है। 'शेर' नाम की इस आधुनिक राइफल का उत्पादन भारत-रूस के संयुक्त उपक्रम के तहत हो रहा है और इसे निर्धारित समय से एक साल पहले, यानी 2032 की जगह 2031 तक सेना को सौंपने का लक्ष्य है।

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समाचार एजेंसी IANS से एक विशेष बातचीत में, इंडो रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) के प्रबंध निदेशक और सीईओ, मेजर जनरल सुधीश कुमार शर्मा ने बताया कि राइफलों की खेप बहुत जल्द भारतीय सेना को सुपुर्द कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेठी के मुंशीगंज में इस राइफल का बनना देश के लिए बेहद गौरव की बात है और यह राष्ट्रहित व सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भारत-रूस संयुक्त उपक्रम

यह महत्वाकांक्षी परियोजना उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा में स्थित IRRPL फैसिलिटी में चल रही है। यह भारत के DPSU और रूस की 'कंसर्न कलाश्निकोव' व 'रोसोबोरोनएक्सपोर्ट' के बीच एक संयुक्त उद्यम है, जिसके तहत 6 लाख से ज़्यादा AK-203 असॉल्ट राइफलें बनाई जानी हैं। मेजर जनरल शर्मा ने इस परियोजना की पृष्ठभूमि पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने IANS से बातचीत में कहा, "साल 2019 के आस-पास, भारतीय सेना और रक्षा मंत्रालय ने तय किया कि हमारी सेनाओं के लिए एके-203 राइफलें भारत में बनाई जाएंगी और इसके लिए टेक्नोलॉजी रूस से आएगी। यह फैसला उस समय लिया गया था, जिसके बाद एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया।"

समय से पहले डिलीवरी का भरोसा

मेजर जनरल शर्मा ने विश्वास जताया कि कंपनी रक्षा मंत्रालय की अपेक्षाओं पर खरी उतरेगी। उन्होंने कहा, "रक्षा मंत्रालय को हम पर पूरा भरोसा है कि हम उन्हें राइफलें समय पर उपलब्ध करा देंगे। मेरा बोर्ड, शेयरधारक और हितधारक सभी इस बात से अवगत हैं। हमारी योजना इसी के अनुरूप बनाई गई है, ताकि हम इन सभी राइफलों का निर्माण इसी गति से कर सकें और अनुबंध के अनुसार निर्धारित समय सीमा 2032 से एक वर्ष पहले भारतीय सेना को सौंप सकें।"

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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