रविवार, 30 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भविष्य की जंग कैसी होगी? AI से अंतरिक्ष तक, तीनों सेनाओं ने नई चुनौतियों पर किया मंथन

अब जंग सिर्फ़ ज़मीन, समंदर या आसमान तक सीमित नहीं रही। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर हमले, अंतरिक्ष में बढ़त और सूचना युद्ध जैसे नए क्षेत्र भविष्य के संघर्षों का स्वरूप तय कर रहे हैं। समाचार…

भविष्य की जंग कैसी होगी? AI से अंतरिक्ष तक, तीनों सेनाओं ने नई चुनौतियों पर किया मंथन
(फोटो: IANS)

अब जंग सिर्फ़ ज़मीन, समंदर या आसमान तक सीमित नहीं रही। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर हमले, अंतरिक्ष में बढ़त और सूचना युद्ध जैसे नए क्षेत्र भविष्य के संघर्षों का स्वरूप तय कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन्हीं आधुनिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति तैयार करने के लिए तीनों सेनाओं ने एक विशेष पाठ्यक्रम में गहन मंथन किया।

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नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित यह चार सप्ताह का 'त्रि-सेवा भविष्य युद्ध पाठ्यक्रम' का चौथा संस्करण था, जो रविवार, 30 अगस्त को संपन्न हुआ। इस पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भविष्य के युद्ध की बदलती प्रकृति को समझना और उसके लिए भारतीय सेनाओं को तैयार करना था। इसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारियों के साथ-साथ रक्षा उद्योग, शिक्षा जगत और सरकारी संगठनों के विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया।

किन नई तकनीकों पर हुई चर्चा?

पाठ्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने उन तकनीकों और रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया जो आने वाले समय में युद्ध की तस्वीर बदल सकती हैं। चर्चा के मुख्य विषयों में भू-राजनीतिक बदलाव, क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर और संज्ञानात्मक युद्ध, स्वायत्त प्रणालियां और अंतरिक्ष आधारित अभियान शामिल थे। इसके अलावा, प्रतिभागियों ने ज़मीन, हवा, समुद्र और अंतरिक्ष जैसे सभी क्षेत्रों में एक साथ सैन्य अभियान चलाने की क्षमता (multi-domain operations) पर भी मंथन किया।

यह आयोजन मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के तत्वावधान में और संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र के समन्वय से किया गया था। पाठ्यक्रम की एक बड़ी खासियत यह थी कि इसमें सिर्फ़ व्याख्यान नहीं हुए, बल्कि प्रतिभागियों को वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों का अभ्यास भी कराया गया। उन्हें वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, नीति-निर्माताओं और वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करने का अवसर भी मिला।

नेतृत्व के लिए नई सोच ज़रूरी

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने भी पाठ्यक्रम में शामिल अधिकारियों से बातचीत की और उनके अनुभव जाने। उन्होंने भविष्य में इस कोर्स को और बेहतर बनाने के लिए नए विषयों को शामिल करने पर जोर दिया।

समापन समारोह में, चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए, जबकि लेफ्टिनेंट जनरल एस.एस. महल (सेवानिवृत्त) ने 'पीजी डिप्लोमा इन फ्यूचर वारफेयर' प्रदान किया। रक्षा मंत्रालय ने भी इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के सैन्य नेतृत्व के लिए सिर्फ पारंपरिक प्रशिक्षण काफी नहीं है, बल्कि तकनीकी समझ और रणनीतिक दूरदर्शिता भी उतनी ही ज़रूरी है। इस पाठ्यक्रम का अगला, पांचवां संस्करण 16 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 के बीच आयोजित करने की योजना है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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