रांची में परिसीमन और खनन बिल के खिलाफ आदिवासी एकता रैली, कांग्रेस नेताओं ने सरकार को दी चेतावनी
रांची में कांग्रेस नेताओं और विभिन्न आदिवासी संगठनों ने एकजुट होकर 'आदिवासी एकता महाजुटान' रैली निकाली। इस प्रदर्शन का मुख्य केंद्र आबादी पर आधारित परिसीमन और खान एवं खनिज संशोधन विधेयक का विरोध करना…
रांची में कांग्रेस नेताओं और विभिन्न आदिवासी संगठनों ने एकजुट होकर 'आदिवासी एकता महाजुटान' रैली निकाली। इस प्रदर्शन का मुख्य केंद्र आबादी पर आधारित परिसीमन और खान एवं खनिज संशोधन विधेयक का विरोध करना था। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने इन प्रस्तावों को आदिवासियों की राजनीतिक भागीदारी और उनके संसाधनों पर अधिकारों को कमजोर करने की एक साजिश करार दिया है।
कांग्रेस के पूर्व विधायक बंधु तिर्की के नेतृत्व में आयोजित इस रैली में शामिल नेताओं ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे कड़ा संघर्ष करेंगे।
परिसीमन पर क्या है आपत्ति?
आदिवासी नेताओं और संगठनों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि यदि जनसंख्या के आधार पर सीटों का परिसीमन किया गया, तो आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विधानसभा और लोकसभा की सीटें कम हो जाएंगी। उनका मानना है कि इससे विधायिका में उनकी आवाज और प्रतिनिधित्व कमजोर होगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने याद दिलाया कि 2011 में भी इन्हीं चिंताओं के कारण झारखंड और कुछ अन्य राज्यों में परिसीमन की प्रक्रिया रोक दी गई थी, क्योंकि तब भी आदिवासियों की संख्या और भागीदारी घट रही थी।
नेताओं ने क्या कहा?
रैली को संबोधित करते हुए बंधु तिर्की ने कहा, "परिसीमन में जनसंख्या के आधार पर अगर हमारी सीट घटी तो ईंट से ईंट बजा देंगे। खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को वापस लेना ही होगा। विपक्ष इसी तरह की बात करता है। छत्तीसगढ़ और झारखंड में आदिवासियों का क्या हाल है?"
वहीं, कांग्रेस नेता सुखदेव भगत ने कहा कि यह रैली सरकार की उस कोशिश के खिलाफ है जिसके जरिए वह आदिवासियों की संख्या घटाकर उनकी आवाज दबाना चाहती है। उन्होंने कहा, "निश्चित रूप से सड़कों पर हमारी जनता है, सदन में राहुल गांधी के नेतृत्व में हमलोग संघर्ष करेंगे।" एक अन्य नेता ने इस रैली को भाजपा के नए नियमों और आदिवासियों को बांटने की कोशिशों के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी शंखनाद बताया।
इनपुट: IANS



