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नीतीश के बाद सोनिया को लगा एक और झटका!

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2019 लोकसभा चुनाव से पहले किसी भी तरफ से कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं आ रहे हैं। जहां महागठबंधन की डोर तोड़कर नीतीश कुमार निकल लिए वहीं बंगाल में साथ मिलकर लड़ने वाले मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी ने अब कांग्रेस के साथ किसी भी चुनावी गठबंधन को लेकर साफ इनकार कर दिया है। मंगलवार को पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि पार्टी किसी भी ऐसे गठबंधन का हिस्सा नहीं होगी जिसमें कांग्रेस शामिल हो।

हालांकि उन्होंने कहां कि सांप्रदायिकता और हिंसा के खिलाफ एक मंच पर शामिल होना, एक अलग मुद्दा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस का कोर एजेंडा चिंता का विषय है। गत कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल के हालात में काफी परिवर्तन हुए हैं। स्थिति गंभीर होती जा रही है। सांप्रदायिक ताकतों को बल मिल रहा है। मौजूदा राज्य सरकार की नीति भी इसके लिए कहीं न कहीं जिम्मेदार हैं।

माकपा महासचिव ने यह भी कहा कि जदयू नेता शरद यादव के ‘साझी विरासत बचाओ’ अभियान में पार्टी शामिल जरूर रहेगी। पटना में राजद के महारैली में माकपा के शामिल नहीं होने लेकिन जदयू नेता के अभियान में जुड़े रहने के प्रश्न पर येचुरी ने कहा कि उनकी पार्टी साझी विरासत बचाने के मकसद से होनेवाले अभियान व उसकी कार्यसूची में हिस्सा लेगी। साझी विरासत बचाना एक बड़ा मुद्दा है। चुनावी गठबंधन के इरादे से रैली व कार्यसूची में शामिल होना अलग मुद्दा है। कांग्रेस के साथ ‘महागठबंधन’ की किसी भी रैली में माकपा शामिल नहीं होगी। माकपा अपने पार्टी लाइन के अनुसार ही चलेगी।
गौरतलब है कि गत रविवार को राजद की ओर से पटना में आयोजित ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ’ रैली में तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया था। इस रैली में माकपा नेता शामिल नहीं हुए थे।

माकपा-कांग्रेस दूरी का कारण

गौरतलब है कि अमेरिका से परमाणु संधि होने के मामले के विरोध के बाद माकपा समेत लेफ्ट गठबंधन यूपीए-2 हो गए थे, जिसके बाद ममता बैनर्जी ने यूपीए-2 के साथ आ गई थीं। लेकिन 2016 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और लेफ्ट मिलकर चुनाव लड़ने के बावजूद हार गए। लेफ्ट के साथ कांग्रेस गठबंधन को लेकर ममता बेहद ही नाराज थीं, और अब फिर से ममता और कांग्रेस के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं, ऐसे में माकपा का कांग्रेस से दूर जाना तो लाजमी है। आखिर ममता ने ही पश्चिम बंगाल की सत्ता से लेफ्ट को दूर कर दिया था, और अब भी दूर ही रखा है। इसमें भी कोई संदेह नहीं कि लालू की रैली में माकपा का शामिल नहीं होने की वजह ममता ही है। हो ना हो इसी इन्हीं वजहों से राहुल और सोनिया रैली में नहीं गए और अपने सिपहसालार गुलाम नबी को भेज दिया, पर माकपा को तो तब बुरा लगा और उन्होंने खुलेआम कांग्रेस से किसी भी चुनावी गठबंधन से इनकार कर दिया।

भाजपा-तृणमूल के खिलाफ आंदोलन की तैयारी

पश्चिम बंगाल के लिए सबसे बड़ा खतरा तृणमूल कांग्रेस व भाजपा है। दोनों दलों की नीतियों की वजह से आम जनता कई समस्याओं से रूबरू हैं। यह आरोप माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने लगाया है। वे माकपा राज्य कमेटी की बैठक में शामिल हुए थे। बैठक के दौरान उन्होंने भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ लगातार आंदोलन करने का आह्वान किया है।

 

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