RSGSM प्रोडक्शन हाउस में बिना होलोग्राम लगी शराब पेटियां मिली: एल्कोहोल की मात्रा भी कम,प्रभारी सहित 9 के खिलाफ मुकदमा दर्ज – Sikar News h3>
सीकर में राजस्थान स्टेट गंगानगर शुगर मिल्स लिमिटेड के प्रोडक्शन हाउस में देसी शराब के निर्माण में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जयपुर से औचक निरीक्षण के लिए आई टीम को करीब 268 पेटी देशी शराब बिना होलोग्राम और लेबल लगी हुई मिली। इतना ही नहीं इनमें एल
.
RSGSM मुख्यालय जयपुर के प्रबंधक(प्रोडक्शन) विष्णु खूंटेटा ने सीकर के उद्योग नगर पुलिस थाने में शिकायत देकर बताया कि राजस्थान स्टेट गंगानगर शुगर मिल्स लिमिटेड एक सरकारी उपक्रम है। जिसके अधीन ही मदिरालय सीकर में देसी शराब के प्रोडक्शन और बेचने का काम किया जाता है। जिससे कि सरकार को राजस्व मिलता है। मदिरालय में 40 यूपी(अंडर प्रूफ) तेजी की देसी शराब प्लास्टिक पव्वे में भरी जाती है। इसके बाद उन पर होलोग्राम लगाने और शराब पेटी भरने पर पेटी को स्कैन करने का काम मैसर्स सुंदरम टेक्नोलॉजीज मुंबई का है। शराब की पेटी भरने के बाद स्कैन होने होने पर ही वह बेचने योग्य होती है। 3 जून की शाम मुख्यालय से आई एक टीम ने सीकर मदिरालय का औचक निरीक्षण किया।
इस निरीक्षण के दौरान सामने आया कि देसी शराब की 268 पेटी पर होलोग्राम नहीं लगा हुआ था। बिना होलोग्राम के ही इन्हें डिलीवरी शटर के पास रखा हुआ था। जिससे ऐसा लगता है कि बिना शराब के मूल्य और आबकारी शुक्ल का भुगतान किए बिना ही इन्हें अवैध रूप से बेचने के लिए रखा गया हो। यह शराब निर्धारित एल्कोहोल तेजी (60 डिग्री प्रूफ स्ट्रैंथ) से कम एल्कोहोल तेजी(52.90 डिग्री प्रूफ स्ट्रैंथ) की तैयार की जाकर इलीगल रूप से शराब की क्वालिटी कम करके अतिरिक्त शराब निर्माण कर बिना होलोग्राम और लेबल लगाए बेचने के लिए रखी थी। जिससे कि राज्य सरकार और संस्थान को करीब 6.50 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है।
निरीक्षण के दौरान ही सामने आया कि रिडक्शन सेंटर में बिना होलोग्राम वाली शराब के पास 602 शराब की पेटी रखी हुई थी। जिन पर होलोग्राम और लेबल लगे हुए थे। इनमें एल्कोहोल की तेजी 60 डिग्री की बजाय 52.50 ही पाई गई। इस तरह से शराब की क्वालिटी कम करके उसे बेचने के लिए रखा गया। निरीक्षण के दौरान ही सामने आया कि प्लास्टिक के ओवरहेड टैंक में 500, फिल्टर लाइन में 200,भराई लाइन में 46 लीटर मिलाकर कुल 745 लीटर शराब कम एल्कोहोल तेजी की पाई गई। जो निर्धारित स्टॉक से ज्यादा थी। इसे भी अवैध रूप से बेचने के लिए रखा गया होगा। जब टीम के द्वारा होलोग्राम का भौतिक सत्यापन किया गया तो कुल 16.84.560 होलोग्राम पाए गए लेकिन उनका रिकॉर्ड सही तरीके से मेंटेन नहीं था। इसके अतिरिक्त ब्लेंड स्टील की टंकी की जांच की गई तो उनमें भी गड़बड़ी मिली।
ऐसे में इन अनियमितताओं के लिए फर्म जिम्मेदार है। फर्म के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जिले में शराब के निर्माण से लेकर बेचने और वितरण,अवैध शराब की रोकथाम पर नियंत्रण और सुपरविजन का काम यहां पर ड्यूटी कर रहे आबकारी अधिकारी सहित कार्मिकों का है। इनकी भी भूमिका संदिग्ध है जिसकी भी जांच होनी चाहिए।
प्रबंधक विष्णु की रिपोर्ट पर उद्योग नगर थाना के प्रभारी जयपाल, अकाउंट्स डिपार्टमेंट के भवानी सिंह,सूचना सहायक हीरालाल, वरिष्ठ लिपिक ओमसिंह,टंकीमेन सोलाराम, सहायक आबकारी अधिकारी नवीन कुमार, सहायक प्रशासनिक अधिकारी नाहर सिंह, आबकारी निरोधक दल के सिपाही दुर्गा प्रसाद और रेक्सको गार्ड महेंद्र सिंह के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है।
मामले में SHO राजेश कुमार बुडानिया का कहना है कि RSGSM अधिकारियों के द्वारा मुकदमा दर्ज करवाया गया है। इन्वेस्टिगेशन में ही सामने आएगा की गड़बड़ी हुई है या नहीं।
मामले में जिला आबकारी अधिकारी लक्ष्मीनारायण का कहना है कि जब उन्हें इस बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने भी सीकर के आबकारी थाना सीकर में फर्म के मैनेजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया था। जिसकी फिलहाल जांच भी जारी है।



