मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
अपराध

बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला: ED ने पार्थ चटर्जी समेत अन्य के खिलाफ सप्लीमेंट्री शिकायत की दर्ज, ₹630 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई का खुलासा

पश्चिम बंगाल के चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच का दायरा और कस दिया है। एजेंसी ने कोलकाता की एक विशेष पीएमएलए अदालत में पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी, उनकी सहयोगी…

बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला: ED ने पार्थ चटर्जी समेत अन्य के खिलाफ सप्लीमेंट्री शिकायत की दर्ज, ₹630 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई का खुलासा
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल के चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच का दायरा और कस दिया है। एजेंसी ने कोलकाता की एक विशेष पीएमएलए अदालत में पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी, उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी और अन्य आरोपियों के खिलाफ एक सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (पूरक अभियोजन शिकायत) दायर की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 20 अगस्त को दायर की गई यह शिकायत ग्रुप-सी और ग्रुप-डी कर्मचारियों की भर्ती में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले से जुड़ी है।

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ईडी ने अपनी जांच में पाया है कि यह पूरा घोटाला एक सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, जिसमें नौकरी के बदले रिश्वत का एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। इसमें मुख्य बिचौलिए के तौर पर प्रसन्न कुमार रॉय का नाम सामने आया है, जो अपने साथियों के साथ मिलकर नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों से पैसे वसूलता था और उन्हें आगे पहुंचाता था।

कैसे हुआ पूरा घोटाला?

जांच के मुताबिक, अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी देने के लिए कई गैर-कानूनी तरीके अपनाए गए। इनमें ओएमआर शीट के अंकों में हेरफेर करना, मेरिट लिस्ट में रैंक को ऊपर-नीचे करना, फर्जी सिफारिश पत्र जारी करना और भर्ती पैनल की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी अवैध नियुक्तियां करना शामिल था। ईडी ने बताया कि इस प्रक्रिया में भर्ती के तय नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया था।

पार्थ चटर्जी की भूमिका और पैसों का लेन-देन

एजेंसी ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी का पश्चिम बंगाल केंद्रीय स्कूल सेवा आयोग (WBCSSc) पर पूरा नियंत्रण था। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध भर्तियों में मदद की। उनके ही निर्देश पर अयोग्य उम्मीदवारों की सूची तैयार की जाती थी, जिसे बाद में बिचौलियों के माध्यम से नियुक्ति पत्र जारी करने के लिए भेजा जाता था।

घोटाले में पदों के हिसाब से अलग-अलग रकम वसूली गई। ग्रुप-सी पदों के लिए 15-16 लाख रुपए और ग्रुप-डी पदों के लिए 10-12 लाख रुपए तक लिए गए। कुछ मामलों में यह रकम 20 लाख रुपए तक भी पहुंची।

₹630 करोड़ की अवैध कमाई का अनुमान

ईडी का अनुमान है कि अकेले ग्रुप-सी और ग्रुप-डी भर्ती घोटाले में अपराध से हुई कमाई कम से कम 630.40 करोड़ रुपए है। हालांकि, एजेंसी का मानना है कि असल रकम इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है, क्योंकि घोटाले में रैंक जंपिंग और पैनल के बाहर से की गई नियुक्तियों जैसे अन्य तरीके भी शामिल थे।

जांच में यह भी सामने आया कि इस अवैध कमाई को शेल (फर्जी) कंपनियों और सहयोगियों के नेटवर्क के जरिए ठिकाने लगाया गया। अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों से पहले ही करीब 49.80 करोड़ रुपए नकद और 5.08 करोड़ रुपए के सोने-गहने जब्त किए जा चुके हैं। एजेंसी के अनुसार, अर्पिता इस अवैध फंड की रखवाली करती थीं और कई फर्जी कंपनियों में निदेशक भी थीं।

कुल मिलाकर एसएससी और प्राइमरी टीचर भर्ती घोटाले के मामलों में ईडी अब तक 702 करोड़ रुपए से ज़्यादा की अवैध कमाई का पता लगा चुकी है, जिसमें से लगभग 247.35 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 3 अप्रैल 2025 के अपने एक फैसले में 25,000 से ज्यादा शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया था।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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