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सरदार पटेल द्वारा RSS पर प्रतिबंध (Banned) क्यों लगा था?

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सरदार पटेल भारत के स्वतंत्र आंदोलन की रीढ़ माने जाते थे। उन्होंने देश की आजादी में बढ़ चढ़ कर योगदान दिया। इन्होंने देश को एक करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। सरदार पटेल देश प्रेमी थे उनके लिए सबसे प्रथम देश था वो एक निष्ठवान राष्ट्रवाद थे। देश के गृहमंत्री के तोर पर उन्होंने कई साहसी फैसले लिए और भारत को प्रगति और विकास के तरफ बढ़ाया। उसी तरह RSS यानि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी देश में राष्ट्रवाद विचारधारा को बढ़ावा देने की लिए जाना जाता है।

क्या आप जानते है एक ऐसा भी वक़्त था जब देश के पूर्व गृहमंत्री ने RSS को बैन कर दिया था। वो संघ के विरोधी तो नहीं थे लेकिन उसकी हिन्दू राष्ट्र या मुस्लिम विरोधी विचारधारा पटेल को खटकती थी।

देश के पिता महात्मा गांधी की हत्या के बाद पटेल ने 4 फरवरी 1948 को RSS पर प्रतिंबध लगा दिया था। उस वक्त वो देश के गृह मंत्री के तोर पर आपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे थे। उन्होंने प्रतिबंध लगाते हुए चिट्ठी में कहा था, ”इसमें कोई दो राय नहीं कि RSS ने हिन्दू समाज की सेवा की है। जहां भी समाज को जरूरत महसूस हुई, वहां संघ ने बढ़-चढ़कर सेवा की। ये सच मानने में कोई हर्ज नहीं है। पर इसका एक चेहरा और भी है, जो मुसलमानों से बदला लेने के लिए उन पर हमले करता है। हिन्दुओं की मदद करना एक बात है, लेकिन गरीब, असहाय, महिला और बच्चों पर हमला असहनीय है।”खबरों के मुताबिक जब देश पिता की हत्या हुई थी तो RSS के सदस्यों ने मिठाई बाटकर इसका जशन मनाया था।

सरदार पटक में कभी RSS पर महात्मा गाँधी की हत्या का सीधा आरोप नहीं लगया लेकिन महात्मा गाँधी और पटेल कभी करीबी थे, और संघ और बीजेपी नेहरू-पटेल जैसे देश के साझा नायकों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करके पॉलिटिक्स कर रहे हैं। पटेल ने भी कभी नहीं सोचा था की एक ऐसा वक़्त भी आएगा जब उन्हें RSS यानि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिंबध लगया जाएगा।

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