TMC के राज्यसभा सांसद सुखेंदु का इस्तीफा, पार्टी भी छोड़ी: दावा- 20 लोकसभा सांसद भी BJP के संपर्क में; 58 विधायकों ने अलग गुट बनाया h3>
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कोलकाता9 मिनट पहले
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सांसदों की सीक्रेट मीटिंग की यह तस्वीर सामने आई है। जिसमें सुखेंदु शेखर भी नजर आ रहे हैं।
विधायकों के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के सांसद भी ममता का साथ छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। सोमवार को सीनियर नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने पार्टी और पद से इस्तीफा दे दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्तीफे के बाद सुखेंदु ने लोकसभा के करीब 20 सांसदों के साथ सीक्रेट मीटिंग की। इसकी एक तस्वीर सामने आई, जिसमें शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, कालीपद सोरेन, जगदीश बसुनिया और अरूप चक्रवर्ती नजर आए।
हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि ये सभी सांसद BJP के संपर्क में हैं।
लोकसभा में TMC के 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। पिछले दिनों हुए घटनाक्रम में बंगाल के 80 में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं।
सुखेंदु ने इस्तीफे के बाद मीडिया से कहा था कि पार्टी के कई लोग ममता मनमाने ढंग से पार्टी चला रही थीं, इसी वजह से उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
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लाइव अपडेट्स
9 मिनट पहले
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बागी विधायक ऋतब्रत बोले- सुखेंदु की बात काफी हद तक सही
सुखेंदु शेखर के इस्तीफे पर बंगाल में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि यह सिर्फ सुखेंदु की निजी बात नहीं है। मैंने सुखेंदु से सीधे बात नहीं की है, लेकिन टीवी पर उनके बयान देखे और सुने हैं। मैं उनकी बातों से सहमत हूं। राज्यसभा के कामकाज को लेकर सुखेंदु की बात काफी हद तक सही है। संसद कोई क्विज खेलने की जगह नहीं है।
13 मिनट पहले
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बंगाल CM शुभेंदु अधिकारी भी दिल्ली पहुंचे
28 मिनट पहले
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त्यागपत्र में भाजपा की तारीफ, TMC की पोल खोली
अपने इस्तीफे में सुखेंदु ने हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में TMC की हार के लिए पार्टी की आलोचना की। इस जनादेश को ममता के 15 साल के अराजक शासन का नतीजा बताया। पढ़ें क्या थीं इस्तीफे में लिखी 4 अहम बातें…
- यह शासन बड़े पैमाने पर बेलगाम भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अत्याचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कानून-व्यवस्था और रोजगार जैसे क्षेत्रों में बुरी तरह नाकाम रहा।
- इतिहास में पहली बार लोगों ने भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में भारी जनादेश दिया। यह जनादेश तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के अराजक शासन को खत्म करने के लिए था।
- पार्टी उस तरीके से नहीं चल रही थी, जैसे चलनी चाहिए। कई नेताओं को स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति नहीं थी। कई-कई बार नेताओं की राय भी नहीं ली जाती थी।
- पार्टी के भीतर ऐसे हालात लंबे समय से चल रहे थे। कई नेताओं ने मजबूरी में इसे स्वीकार कर लिया था। ममता ने चुनाव हारने के बाद न आत्ममंथन किया, न कारण जानने की कोशिश की।
- सुखेंदु ने नई चुनी गई BJP सरकार की भी तारीफ की और कहा कि वे अपने घोषणापत्र के अनुसार राज्य के विकास के लिए कदम उठा रहे हैं। उसने पुनर्निर्माण के लिए पहल शुरू कर दी है।
28 मिनट पहले
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सुखेंदु बोले- अब मैं आम आदमी, चाहता हूं नई सरकार सबकी जांच करे
अपना इस्तीफा सौंपने के बाद सुखेंदु ने कहा बंगाल के इतिहास में पहली बार, पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार सत्ता में आई है। वोटिंग परसेंट 98% पहुंच गया। पार्टी ने इस पर कोई चर्चा नहीं की। 15 साल से सत्ता में रहे लोग आम लोगों की पहुंच से दूर हो गए। हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया। इसके बजाय बिचौलिए, चोर, डकैत और बलात्कारी आगे आ गए। करोड़ों रुपए लूटे गए। अब यह सब सामने आ रहा है।
सुखेंदु ने कहा- मैं अब एक आम नागरिक हूं। नई सरकार से मांग कर सकता हूं कि वे पिछले 5 सालों में बंगाल के हर अस्पताल में हुई खरीदारी की जांच करें। फोरेंसिक ऑडिट होना चाहिए। हमारे देश में बलात्कार और हत्या की घटनाएं अक्सर होती रही हैं। उस समय, नेताओं और प्रशासकों ने इस बारे में कोई विचार-विमर्श या चर्चा नहीं की। लेकिन जिन लोगों ने उन्हें वहां भेजा था, उन्हीं ने अब उन्हें नीचे गिरा दिया है। इसलिए सबकी जांच होनी चाहिए।




