Advertising
Home Top stories श्रीमद्भागवतकथा में संतों ने दिया धर्म और संस्कारों का संदेश: सनातन...
Advertising
<

श्रीमद्भागवतकथा में संतों ने दिया धर्म और संस्कारों का संदेश: सनातन संस्कृति बचाने के लिए युवाओं और मातृशक्ति को आगे आने का आह्वान – Jaipur News

0
श्रीमद्भागवतकथा में संतों ने दिया धर्म और संस्कारों का संदेश:  सनातन संस्कृति बचाने के लिए युवाओं और मातृशक्ति को आगे आने का आह्वान – Jaipur News

श्रीमद्भागवतकथा में संतों ने दिया धर्म और संस्कारों का संदेश: सनातन संस्कृति बचाने के लिए युवाओं और मातृशक्ति को आगे आने का आह्वान – Jaipur News


जयपुर के वैशाली नगर स्थित नेमी सागर कॉलोनी के श्रीराम मंदिर में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के छठे दिन संत-महात्माओं ने श्रद्धालुओं को सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया। संतों ने कहा कि बदलते समय और पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच समाज को अपनी धार्मिक परंपराओं, संस्कारों और परिवार व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की जरूरत है। श्रीराम मंदिर समिति के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त कलाकार रामू रामदेव ने बताया कि समिति, महिला मंडल और सभी पदाधिकारियों के सहयोग से आयोजन सफलतापूर्वक चल रहा है। कथा में जुटे संत-महात्मा, दिया धर्मोपदेश
कथा महोत्सव में नारायणदास महाराज के शिष्य रामरतन दास महाराज, त्रिवेणी धाम पीठाधीश्वर ऋचपाल महाराज, हाथोज धाम मठाधीश्वर एवं हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य महाराज, गलता पीठाधीश्वर अवधेशाचार्य महाराज और स्वामी राघवानंद महाराज सहित कई संत-महात्माओं ने भाग लिया। सभी संतों ने अपने प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कृति और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
परिवार और संस्कारों को बचाने की जरूरत
संतों ने कहा कि भारतीय समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी पारिवारिक व्यवस्था और संस्कार हैं। उन्होंने गृहस्थ जीवन की महत्ता बताते हुए परिवार और वंश परंपरा को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। संतों ने कहा कि यदि समाज परिवार संस्था और सामाजिक जिम्मेदारियों से दूर होता गया तो आने वाले समय में सनातन संस्कृति के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। युवा पीढ़ी और मातृशक्ति को निभानी होगी बड़ी भूमिका
अपने संबोधन में संतों ने विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं से भारतीय संस्कृति, संस्कारों और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना और बच्चों को अच्छे संस्कार देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। रविवार को होगी पूर्णाहुति, महाआरती और भंडारा
वहीं समिति के संरक्षक श्रीनिवास गुप्ता ने बताया कि रविवार को वैदिक मंत्रोच्चार और हवन के साथ कथा महोत्सव की पूर्णाहुति होगी। इसके बाद भव्य महाआरती, महाप्रसाद और भंडारे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धर्मलाभ प्राप्त करने की अपील की।

राजस्थान की और समाचार देखने के लिए यहाँ क्लिक करे – Rajasthan News

Advertising