गूगल ने गुरुग्राम में 6.17 लाख स्क्वायर-फीट ऑफिस स्पेस खरीदा: 5 साल में ₹671 करोड़ चुकाएगी कंपनी, देश में कॉमर्शियल प्रॉपर्टी की डिमांड बढ़ी h3>
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नई दिल्ली40 मिनट पहले
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गूगल इंडिया ने गुरुग्राम के ‘एट्रियम प्लेस’ में करीब 6.17 लाख स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है। प्रॉपस्टैक के ट्रांजैक्शन डॉक्युमेंट्स के मुताबिक, गूगल इस जगह के लिए अगले 5 साल में कुल 671 करोड़ रुपए का किराया चुकाएगी।
यह फ्रेश लीज डील ऐसे समय में हुई है जब देश के ग्रेड ए कॉमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर की डिमांड में भारी तेजी देखी जा रही है।
हर महीने ₹10.55 करोड़ रेंट, ₹63.65 करोड़ सिक्योरिटी डिपॉजिट
गूगल ने गुरुग्राम के एट्रियम प्लेस के ‘टावर 1’ में कुल 6,17,448 स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस रेंट पर लिया है। एट्रियम प्लेस डीएलएफ (DLF) और हाइन्स का एक जॉइंट वेंचर है। इस एग्रीमेंट के तहत गूगल ₹171 प्रति स्क्वायर फीट की लीज रेट से हर महीने लगभग 10.55 करोड़ रुपए का रेंट चुकाएगी।
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इसके साथ ही कंपनी ने 63.65 करोड़ रुपए बतौर सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा किए हैं। अप्रैल 2026 में रजिस्टर्ड हुए इन डॉक्युमेंट्स के अनुसार, इस लीज में हर तीन साल में किराए में 15% की बढ़ोतरी का नियम भी शामिल है। यह नई लीज 1 अक्टूबर 2025 से शुरू हो चुकी है, जो कॉमर्शियल टावर के दूसरे फ्लोर से लेकर 16वें फ्लोर तक के हिस्से को कवर करती है।
पिछले साल भी गूगल ने की थी 2 बड़ी लीज डील्स
गूगल लगातार भारत में अपना ऑफिस स्पेस बढ़ा रहा है। इस फ्रेश लीज से पहले साल 2025 में भी कंपनी ने मैनेज्ड वर्कस्पेस प्रोवाइडर ‘टेबलस्पेस’ से 5,50,000 स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया था।
इतना ही नहीं, साल 2025 में ही गूगल ने ईस्ट बेंगलुरु के डोडदानेकुंडी में अपने करीब 8,70,000 स्क्वायर फीट के ऑफिस स्पेस की लीज को रिन्यू भी किया था, जिसके लिए कंपनी सालाना 90 करोड़ रुपए का रेंट कमिटमेंट दे रही है।
गुरुग्राम में डीएलएफ एसेट्स की मांग तेज
यह डील ऐसे समय पर सामने आई है जब गुरुग्राम में डीएलएफ के कॉमर्शियल एसेट्स की मांग में तगड़ा उछाल आया है। पिछले हफ्ते ही एयरबीएनबी ने अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के लिए गुरुग्राम के डीएलएफ साइबर सिटी में 46,437 स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस 5 साल के लिए लीज पर लिया है। एयरबीएनबी इसके लिए करीब 61.53 लाख रुपए का शुरुआती मंथली रेंट चुका रही है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेक्नोलॉजी सेक्टर की दिग्गज कंपनियां अब ₹130 प्रति स्क्वायर फीट से ज्यादा के रेट पर लॉन्ग-टर्म और हाई-वैल्यू लीज एग्रीमेंट साइन कर रही हैं। यह इस बात का साफ संकेत है कि देश में ग्रेड ए कॉमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग बेहद मजबूत बनी हुई है।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का दबदबा कायम
भारत के ऑफिस लीज मार्केट को आगे बढ़ाने में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की सबसे बड़ी भूमिका है। जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही के दौरान भारत में कुल 20.7 मिलियन स्क्वायर फीट (msf) ऑफिस स्पेस लीज पर लिया गया। इसमें से अकेले GCCs की हिस्सेदारी 9.1 मिलियन स्क्वायर फीट रही, जो कुल एब्जॉर्प्शन का 44% हिस्सा है।
क्या होते हैं ग्रेड ए कॉमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर और GCC?
- ग्रेड ए कॉमर्शियल प्रॉपर्टी: यह रियल एस्टेट की सबसे प्रीमियम कैटेगरी होती है। इसमें बेहतरीन लोकेशन, वर्ल्ड-क्लास बिल्डिंग क्वालिटी, एडवांस सिक्योरिटी, हाई-टेक लाइफ सपोर्ट सिस्टम और टॉप-नोच एमिनिटीज (सुविधाएं) मिलती हैं। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां ऐसे ही दफ्तर चुनती हैं।
- ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC): ये किसी विदेशी कंपनी के भारत या अन्य देशों में स्थापित वो सेंटर्स होते हैं, जो मुख्य कंपनी के लिए आईटी सपोर्ट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, डेटा एनालिटिक्स और कस्टमाइज़्ड टेक सॉल्यूशंस का काम खुद संभालते हैं। इन्हें पहले बैक-ऑफिस भी कहा जाता था, लेकिन अब ये कोर टेक्नोलॉजी पर काम करते हैं।
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गूगल इंडिया ने गुरुग्राम के ‘एट्रियम प्लेस’ में करीब 6.17 लाख स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया है। प्रॉपस्टैक के ट्रांजैक्शन डॉक्युमेंट्स के मुताबिक, गूगल इस जगह के लिए अगले 5 साल में कुल 671 करोड़ रुपए का किराया चुकाएगी।
यह फ्रेश लीज डील ऐसे समय में हुई है जब देश के ग्रेड ए कॉमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर की डिमांड में भारी तेजी देखी जा रही है।
हर महीने ₹10.55 करोड़ रेंट, ₹63.65 करोड़ सिक्योरिटी डिपॉजिट
गूगल ने गुरुग्राम के एट्रियम प्लेस के ‘टावर 1’ में कुल 6,17,448 स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस रेंट पर लिया है। एट्रियम प्लेस डीएलएफ (DLF) और हाइन्स का एक जॉइंट वेंचर है। इस एग्रीमेंट के तहत गूगल ₹171 प्रति स्क्वायर फीट की लीज रेट से हर महीने लगभग 10.55 करोड़ रुपए का रेंट चुकाएगी।
इसके साथ ही कंपनी ने 63.65 करोड़ रुपए बतौर सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा किए हैं। अप्रैल 2026 में रजिस्टर्ड हुए इन डॉक्युमेंट्स के अनुसार, इस लीज में हर तीन साल में किराए में 15% की बढ़ोतरी का नियम भी शामिल है। यह नई लीज 1 अक्टूबर 2025 से शुरू हो चुकी है, जो कॉमर्शियल टावर के दूसरे फ्लोर से लेकर 16वें फ्लोर तक के हिस्से को कवर करती है।
पिछले साल भी गूगल ने की थी 2 बड़ी लीज डील्स
गूगल लगातार भारत में अपना ऑफिस स्पेस बढ़ा रहा है। इस फ्रेश लीज से पहले साल 2025 में भी कंपनी ने मैनेज्ड वर्कस्पेस प्रोवाइडर ‘टेबलस्पेस’ से 5,50,000 स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस लीज पर लिया था।
इतना ही नहीं, साल 2025 में ही गूगल ने ईस्ट बेंगलुरु के डोडदानेकुंडी में अपने करीब 8,70,000 स्क्वायर फीट के ऑफिस स्पेस की लीज को रिन्यू भी किया था, जिसके लिए कंपनी सालाना 90 करोड़ रुपए का रेंट कमिटमेंट दे रही है।
गुरुग्राम में डीएलएफ एसेट्स की मांग तेज
यह डील ऐसे समय पर सामने आई है जब गुरुग्राम में डीएलएफ के कॉमर्शियल एसेट्स की मांग में तगड़ा उछाल आया है। पिछले हफ्ते ही एयरबीएनबी ने अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के लिए गुरुग्राम के डीएलएफ साइबर सिटी में 46,437 स्क्वायर फीट ऑफिस स्पेस 5 साल के लिए लीज पर लिया है। एयरबीएनबी इसके लिए करीब 61.53 लाख रुपए का शुरुआती मंथली रेंट चुका रही है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेक्नोलॉजी सेक्टर की दिग्गज कंपनियां अब ₹130 प्रति स्क्वायर फीट से ज्यादा के रेट पर लॉन्ग-टर्म और हाई-वैल्यू लीज एग्रीमेंट साइन कर रही हैं। यह इस बात का साफ संकेत है कि देश में ग्रेड ए कॉमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग बेहद मजबूत बनी हुई है।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स का दबदबा कायम
भारत के ऑफिस लीज मार्केट को आगे बढ़ाने में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की सबसे बड़ी भूमिका है। जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही के दौरान भारत में कुल 20.7 मिलियन स्क्वायर फीट (msf) ऑफिस स्पेस लीज पर लिया गया। इसमें से अकेले GCCs की हिस्सेदारी 9.1 मिलियन स्क्वायर फीट रही, जो कुल एब्जॉर्प्शन का 44% हिस्सा है।
क्या होते हैं ग्रेड ए कॉमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर और GCC?
- ग्रेड ए कॉमर्शियल प्रॉपर्टी: यह रियल एस्टेट की सबसे प्रीमियम कैटेगरी होती है। इसमें बेहतरीन लोकेशन, वर्ल्ड-क्लास बिल्डिंग क्वालिटी, एडवांस सिक्योरिटी, हाई-टेक लाइफ सपोर्ट सिस्टम और टॉप-नोच एमिनिटीज (सुविधाएं) मिलती हैं। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां ऐसे ही दफ्तर चुनती हैं।
- ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC): ये किसी विदेशी कंपनी के भारत या अन्य देशों में स्थापित वो सेंटर्स होते हैं, जो मुख्य कंपनी के लिए आईटी सपोर्ट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, डेटा एनालिटिक्स और कस्टमाइज़्ड टेक सॉल्यूशंस का काम खुद संभालते हैं। इन्हें पहले बैक-ऑफिस भी कहा जाता था, लेकिन अब ये कोर टेक्नोलॉजी पर काम करते हैं।
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