टोंक में वीसी बोले-बच्चों की देखभाल यूनानी चिकित्सा से करें: सेमीनार में पीलिया के कारण और समाधान पर हुई चर्चा – Tonk News h3>
वाइस चांसलर आज टोंक दौरे पर आए, यहां उनका स्वागत किया गया।
टोंक में यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ यूनानी सोमवार को मानव संसाधन विकास केंद्र एवं विभाग इलमुल अतफाल के सहयोग से नवजात पीलिया ( Neonatal Jaundice) के विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया।
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इस सेमिनार का उद्देश्य नवजात शिशुओं में होने वाले पीलिया के कारणों, लक्षणों और यूनानी सिद्धांतों पर आधारित उपचार एवं रोकथाम को लेकर जागरूकता बढ़ाना था। इस सेमिनार के मुख्य अतिथि डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ला एवं विशिष्ट अतिथि कॉलेज के नोडल अधिकारी डॉ राकेश कुमार शर्मा रहे। सेमिनार में मुख्य वक्ता के तौर पर डॉक्टर इमरान खान एसोसिएट प्रोफेसर विभाग इलमुल अतफाल ने व्याख्यान दिया।
मुख्य अतिथि कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ला ने नवजात पीलिया को नवजात शिशुओं में पाई जाने वाली सबसे सामान्य स्वास्थ्य समस्या बताते हुए यूनानी चिकित्सा के सिद्धांतों को आधुनिक नवजात शिशु देखभाल के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
आज नवजात पीलिया के विषय पर हुए सेमिनार में मौजूद यूनानी कॉलेज के छात्र छात्राएं।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा स्वयं में सर्वोच्च मानवीय कर्तव्य है। छात्रों को चाहिए कि वे उत्कृष्ट चिकित्सक बनकर समाज की सेवा करें और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने यह भी जोर दिया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदना के साथ तैयार होने वाले चिकित्सक ही देश को स्वास्थ्य क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक ले जा सकते हैं।
विशिष्ट अतिथि डॉ राकेश शर्मा ने नवजात स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए यूनानी चिकित्सा पद्धति पर आधारित अनुसंधान को बढ़ावा एवं अभिभावकों में सामुदायिक जागरूकता पर ज़ोर दिया। सेमिनार में मुख्य वक्ता डॉक्टर इमरान खान ने बताया नवजात पीलिया जीवन के पहले 2 हफ्तों में सबसे अधिक बार सामना की जाने वाली चिकित्सा स्थिति है और लगभग 60% पूर्ण अवधि और 80% समय से पहले जन्मे नवजात शिशुओं में जन्म के बाद पहले सप्ताह में नैदानिक पीलिया विकसित होता है। यदि निदान या उपचार न किया जाए, तो नवजात शिशु पीलिया गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
पीलिया से पीड़ित नवजात शिशुओं में त्वचा और श्वेतपटल का पीला रंग असंयुग्मित बिलीरुबिन के संचय का परिणाम है। उन्होंने बताया कि नवजात पीलिया में शीघ्र पहचान, सहायक देखभाल, तथा अनुसंधान-आधारित यूनानी उपचारों को चिकित्सकीय निगरानी में अपनाने से परिणामों में सुधार संभव है।
इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य, उप प्राचार्य एवं सभी शिक्षकों ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर के नवनियुक्त कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ला जी का अभिनंदन और स्वागत किया।
वीसी शुक्ला ने कॉलेज एवं चिकित्सालय में करीब दो करोड़ रुपए से चल रहे निर्माण कार्य का अवलोकन किया और आवश्यक कार्रवाई के लिए दिशा निर्देश दिए। सेमिनार का संचालन डॉक्टर सैयद अब्दुल मुजीब एसोसिएट प्रोफेसर विभाग तशरीहुल बदन एवं डॉक्टर सरफराज अहमद एसोसिएट प्रोफेसर विभाग मोआलेजात एवं कोऑर्डिनेटर मानक संसाधन विकास केंद्र ने किया।
सेमिनार में प्राचार्य डॉक्टर इरशाद खान एवं उप प्राचार्य डॉक्टर नाजिया शमशाद ने आभार व्यक्त किया।



