लखनऊ में पार्षद निधि की कैंपिंग से बढ़ा विरोध: पार्षदों और महापौर के बीच चल रहा विवाद थमा नहीं, सदन बैठक रहेगी हंगामेदार – Lucknow News h3>
लखनऊ नगर निगम में महापौर और पार्षदों के बीच में विवाद अभी थमा नहीं है। एजेंडे में बढ़ी पार्षद निधि की कैंपिंग करने से पार्षदों में नाराजगी है। इसको लेकर नाराज पार्षदों ने गुरुवार को पार्टी के महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी और भाजपा नेता नीरज सिंह के सा
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पार्षदों का कहना है कि 24 मार्च को कार्यकारिणी बैठक में जो फैसला किया गया था। एजेंडा अब उससे अलग जा रहा है। भाजपा के संगठन की पार्टी के आयामों को लेकर हुई बैठक में पार्षदों ने प्रस्ताव रख दिया कि अब पार्षद निधि ही न बढ़ाई जाए। इसके साथ ही लालबाग में चाय पर चर्चा करते हुए इसके विरोध की रणनीति पार्षदों ने बनाई।
सदन बैठक से पहले बढ़ी तकरार
पहले 7 अप्रैल, 9 अप्रैल और 12 अप्रैल को सदन की बैठक होने का दावा नगर निगम के अधिकारियों और पार्षदों ने किया। महापौर ने 12 अप्रैल को बैठक करने का निर्देश दिया था, लेकिन पार्टी के स्थापना दिवस को लेकर आयोजित हुए कार्यक्रमों के चलते तय तारीख को आगे बढ़ाने का दावा किया। अब 15 अप्रैल को नगर निगम का सत्र होने की संभावना जताई जा रही है। नाराज पार्षदों का कहना है कि कार्यकारिणी बैठक में 60 लाख रुपए पार्षद निधि बढ़ाने का फैसला किया गया था, लेकिन अब इसके खर्च में कैंपिंग कर इसे निर्धारित कर दिया गया है। इसके चलते 60 लाख रुपए की निधि सिर्फ तय काम में ही खर्च की जा सकेगी। उनका कहना है कि पार्षदों को अपने वार्ड में पैसे को काम के अनुसार उसका उपयोग करने की छूट पहले की तरह ही रहनी चाहिए। अभी पार्षदों की निधि 1 करोड़ 47 लाख रुपए है, जिसे कार्यकारिणी बैठक में 2 करोड़ 10 लाख रुपए निर्धारित किया गया था।
यह तस्वीर पार्षदों की है। बढ़ी निधि की कैंपिंग होने से कई पार्षद नाराज हैं।
एजेंडे में 7 मद में बांटी गई बढ़ी पार्षद निधि
संभावित एजेंडे में 7 मद में बढ़ी पार्षद निधि बांटने का दावा पार्षद कर रहे हैं। उनका कहना है कि 10 लाख रुपए पैच वर्क, पुलिया क्रासिंग बनाने के लिए 10 लाख, फागिंग, चूना और कीटनाशक दवाओं के लिए 5 लाख, हत्थू ठेला खरीद और मरम्मत के लिए 5 लाख, शव के लिए कफ़िन, ई- रिक्शा खरीदने के लिए 10 लाख, पार्क की रंगाई पुताई और संरक्षण के लिए 10 लाख रुपए का प्रस्ताव दिया गया है। नगर निगम के अधिकारियों की तरफ से दो बार एजेंडे को मंजूरी के लिए महापौर को भेजा गया था, लेकिन उन्होंने इसे संशोधन बताते हुए वापस कर दिया था। पार्षदों का दावा है कि अब एजेंडे को मंजूरी मिली है, लेकिन इसमें संशोधन कर दिया गया है।
राजनाथ सिंह ने 48 घंटे में विवाद खत्म करने के दिए थे निर्देश
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दो दिनों में विवाद खत्म करने के निर्देश महानगर बीजेपी और महापौर को दिए थे। मामले में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी मध्यस्थता की। महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी और महापौर सुषमा खर्कवाल ने दिल्ली दरबार में भी हाजिरी लगाई,लेकिन करीब तीन महीने से चल रहे विवाद का पटाक्षेप अभी तक नहीं हो पाया है। यहां तक कि विरोध के चलते नगर निगम के इतिहास में पहली बार कार्यकारणी की बैठक में सदस्य 10 मार्च को ही नहीं पहुंचे थे। इसके बाद 24 मार्च को फिर से बैठक की गई। कार्यकारिणी में कई प्रस्तावों को मंजूरी मिली। दोनों पक्षों को तरफ से शांति के दावे किए गए, लेकिन अब विवाद फिर से बढ़ रहा है।
सपा पार्षदों की बैठक से भी बढ़ी नाराजगी
लखनऊ नगर निगम में विवाद नहीं थमने से सदन बैठक में जमकर हंगामा होने के आसार हैं। 15 अप्रैल को नगर निगम के सदन की बैठक होने का अनुमान है,लेकिन गुरुवार शाम 4 बजे तक पार्षद एजेंडा नहीं मिलने का दावा कर रहे। बुधवार को सपा पार्षदों की महापौर के कैंप कार्यालय पर बैठक करने की शिकायत भी पार्षदों ने महानगर भाजपा के पदाधिकारियों से की है। पार्षदों ने कहा कि महापौर सपा के दल की बैठक कैसे कर सकती हैं? वहीं, सपा के पार्षदों का कहना है कि वह सदन बैठक बुलाने की मांग करने के लिए बैठक करने गए थे।





