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Delhi Crime: सेक्सटॉर्शन के धंधे में अब नाबालिगों की एंट्री, स्कूल ड्रॉप आउट बच्चों को दी जाती है धंधे की पूरी ट्रेनिंग

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Delhi Crime: सेक्सटॉर्शन के धंधे में अब नाबालिगों की एंट्री, स्कूल ड्रॉप आउट बच्चों को दी जाती है धंधे की पूरी ट्रेनिंग

Delhi Crime: सेक्सटॉर्शन के धंधे में अब नाबालिगों की एंट्री, स्कूल ड्रॉप आउट बच्चों को दी जाती है धंधे की पूरी ट्रेनिंग

नई दिल्ली: कई साल से सेक्सटॉर्शन के जरिए जबरन वसूली का धंधा चल रहा है, लेकिन दिल्ली पुलिस के हत्थे पहली बार किसी गैंग में शामिल नाबालिग भी चढ़े हैं। अब तक हत्या और ड्रग सप्लाई जैसे अपराधों में शातिर गैंगस्टर या तस्कर ही नाबालिगों का इस्तेमाल करते देखे गए हैं। शाहदरा साइबर थाना पुलिस मेवात से जिस सेक्सटॉर्शन गैंग के पांच मेंबरों को पकड़ कर लाई है, उसमें दो नाबालिग भी हैं। इसलिए पुलिस कुछ और धाराएं जोड़ने पर कानूनी राय ले रही है।

डीसीपी (शाहदरा) रोहित मीणा के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ बताया कि पीड़ित को दिखाए जाने वाला लड़की का न्यूड वीडियो किसी पॉर्न फिल्म का हिस्सा होता था। पीड़ित को कपड़े उतारने के लिए उकसाने को नाबालिगों की वॉयस ओवर दी जाती। पीड़ित को लगता था कि वीडियो में दिख रही लड़की की आवाज है। गैंग में कोई लड़की होती ही नहीं थी। कम उम्र के बच्चों की आवाज पतली होती है, जो कॉल में महिलाओं-लड़कियों जैसी लगती है। इस वजह से पीड़ित आसानी से जाल में फंस जाते थे। पिछले साल राजस्थान पुलिस ने जरूर एक गैंग में नाबालिग होने का खुलासा किया था।

सेक्सटॉर्शन के लिए दी पूरी ट्रेनिंग

पकड़े गए आरोपी स्कूल ड्रॉप आउट हैं। उन्हें सेक्सटॉर्शन की ट्रेनिंग दी गई। किस तरह से पुलिस अफसर बनकर या पत्रकार बनकर या यू-ट्यूबर बनकर बात करनी है। एक के बाद एक कैसे पैसे की वसूली होनी है। इन्हें टेक्नॉलजी में परफेक्ट बनाया गया। सोशल मीडिया के जरिए पीड़ितों को ढूंढने, दिल्ली के थानों की जानकारी, पुलिस अफसरों के नाम और फोटो खंगालने में भी माहिर बनाया गया। फ्रेंड सर्च फॉर चैट: गर्ल्स और फ्रेंड सर्च फॉर टूल 2022 जैसे ऐप्स से टारगेट की पहचान करते हैं। सोशल मीडिया के जरिए इनकी पर्सनल जानकारी हासिल करते थे।

​पुलिस कमिश्नर तक की डीपी

​पुलिस कमिश्नर तक की डीपी

पूर्व कमिश्नर राकेश अस्थाना समेत कई पुलिस अफसरों की डीपी आरोपियों के फोन पर लगी होती थी। इन्हें सोशल मीडिया से लिया जाता था। डीपी पर असली फोटो देख कर पीड़ित घबरा जाते थे। अधिकतर बुजुर्ग टारगेट पर रहते थे। नाती-पोतों की उम्र में वीडियो बनने से बुजुर्ग चुपचाप पैसे दे देते थे। करीब 95 फीसदी शिकार लोग पुलिस के पास आते ही नहीं हैं। महज पांच फीसदी पीड़ित वो आते हैं, जो बहुत ज्यादा रकम गंवा देते हैं या फिर गिरोह के लोग लगातार उनसे पैसे मांगते रहते हैं।

​मिले 24 पीड़ितों के वीडियो

-24-

पुलिस ने छह फोन और सात सिम कार्ड बरामद किए हैं। इनमें 24 पीड़ितों के अश्लील वीडियो मिले। नैशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की पांच शिकायतें इनसे लिंक हो गई हैं। तीन यूपी, एक उत्तराखंड और एक गुजरात से है। दक्षिण भारत के अलावा मध्य प्रदेश और असम तक में ठगी की गई है। पीड़ितों का पता लगाया जा रहा है। आरोपियों के सोनीपत और पानीपत में चार बैंक खाते मिले हैं, जिनमें 3-4 महीने में 40 लाख रुपये का ट्रांजैक्शन मिला है। आरोपियों ने 20 से ज्यादा पीड़ितों से ये रकम ऐंठी हैं। फिलहाल ये अकाउंट फ्रीज किए गए हैं।

फर्जी आईडी पर लेते थे सिम

फर्जी आईडी पर लेते थे सिम

आरोपी सिम कार्ड और मोबाइल फोन पश्चिम बंगाल से खरीदते थे। अन्य आरोपियों की मदद से फर्जी बैंक खाते खुलवाते थे। इन्हीं में पीड़ित से पैसे ट्रांसफर करवाते थे। पुलिस गैंग के बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है, जिनकी पहचान कर ली गई है। पुलिस का दावा है कि अभी ये चेन काफी लंबी है। फिलहाल तो पीड़ितों का पता लगाना भी मुश्किल है, क्योंकि उनकी कोई पहचान नहीं मिल पा रही है। कुछ की पहचान हुई तो उन लोगों ने अपने नंबर ही बंद कर रखे हैं।

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​वीडियो कॉल आए तो हो जाएं अलर्ट​

​वीडियो कॉल आए तो हो जाएं अलर्ट​

1. किसी भी अनजान नंबर से आए वीडियो कॉल को कभी पिक नहीं करें।

2. वॉट्सऐप पर वीडियो सेक्स कॉल करने के झांसे में बिल्कुल ना आएं।

3. अगर गलती से कॉल पिक हो जाए या झांसे में आ गए तो घबराएं नहीं।

4. न्यूड के साथ आपकी वीडियो वायरल की धमकी दें तो पुलिस को बताएं।

5. तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर कंप्लेंट दें।

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