भारतीय सेना का हैरतअंगेज बचाव: 18,600 फीट पर तूफानी हवाओं के बीच हेलीकॉप्टर ने बचाया युवक
भारतीय सेना ने लद्दाख की नुन-कुन पर्वत श्रृंखला के पास एक बेहद जोखिम भरे और साहसी अभियान को अंजाम दिया है। 18,600 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर, तेज हवाओं और खतरनाक ढलानों के बीच सेना के पायलटों ने एक युवक…
भारतीय सेना ने लद्दाख की नुन-कुन पर्वत श्रृंखला के पास एक बेहद जोखिम भरे और साहसी अभियान को अंजाम दिया है। 18,600 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर, तेज हवाओं और खतरनाक ढलानों के बीच सेना के पायलटों ने एक युवक को सफलतापूर्वक एयरलिफ्ट किया। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, इस बचाव अभियान को असाधारण सटीकता और हिम्मत के साथ पूरा किया गया।
यह मिशन भारतीय सेना के एविएशन विंग की विशेषज्ञता और साहस का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। सेना के 'फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स' ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस अभियान की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, "ऊंचाई वाले इलाके से घायलों को निकालने का साहसी अभियान। दिन के आखिरी उपलब्ध लैंडिंग विंडो के दौरान किया गया यह मिशन, भारतीय सेना के एविएशन विंग की कुशलता, साहस और संवेदना का प्रमाण है।"
चुनौतियों भरा रेस्क्यू ऑपरेशन
इस ऊंचाई पर बचाव कार्य कई गंभीर चुनौतियों से भरा था। तेज हवाओं और कम वायु दाब के कारण हेलीकॉप्टर के इंजन की क्षमता और रोटर से मिलने वाली लिफ्ट काफी घट जाती है। इसके अलावा, जिस जगह पर मरीज फंसा हुआ था, वहां हेलीकॉप्टर को उतारने के लिए कोई समतल जगह नहीं थी और मौसम भी प्रतिकूल था।
तकनीकी सटीकता और पायलटों का कौशल
इन बाधाओं से निपटने के लिए पायलटों ने एक विशेष रणनीति अपनाई। हेलीकॉप्टर का वजन कम करने के लिए सभी गैर-जरूरी उपकरण हटा दिए गए और ईंधन भी सीमित मात्रा में लिया गया ताकि उसकी उठाने की क्षमता अधिकतम हो सके। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पायलटों ने हेलीकॉप्टर को हवा में खतरनाक रूप से कम ऊंचाई पर स्थिर रखा। इसके बाद उन्होंने हेलीकॉप्टर को इस तरह संतुलित किया कि उसका केवल एक स्किड (पैर) ही खड़ी ढलान को छू रहा था। इस बेहद मुश्किल स्थिति में मरीज को तेजी से हेलीकॉप्टर के अंदर सुरक्षित किया गया, जिसके बाद चालक दल सफलतापूर्वक उसे लेकर नीचे उतरा।
इनपुट: IANS



