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लुटियंस दिल्ली से बाहर हुए औरंगज़ेब, दिल्ली के किस किले में बचे हैं औरंगजेब के अवशेष, जानें

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लुटियंस दिल्ली से बाहर हुए औरंगज़ेब, दिल्ली के किस किले में बचे हैं औरंगजेब के अवशेष, जानें

लुटियंस दिल्ली से बाहर हुए औरंगज़ेब, दिल्ली के किस किले में बचे हैं औरंगजेब के अवशेष, जानें

नई दिल्लीः औरंगजेब रोड का नाम 2017 में बदला गया था। नाम बदलने वाले भूल गए थे या उन्हें पता ही नहीं था कि लुटियंस दिल्ली में ही औरंगजेब लेन भी है। खैर, अब औरंगजेब लेन का नाम भी बदल कर एपीजे अब्दुल कलाम लेन कर दिया गया है। औरंगजेब रोड का पहले ही नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ कलाम पर रख दिया गया था। मुगल सल्तनत को दक्कन तक ले जाने वाले औरंगजेब का नाम लुटियंस दिल्ली में 1931 से था। दरअसल उसी साल नई दिल्ली का उद्‌घाटन हुआ था और तब तक लुटियंस जोन की सड़कों के नाम इतिहासकार पर्सिवल स्पीयर की सलाह पर रखे गए थे। वे सेंट स्टीफंस कॉलेज में पढ़ाते थे। स्पीयर की सलाह पर लगभग सभी प्रमुख मुगल बादशाहों के नाम पर लुटियंस जोन में सड़कों के नाम रखे गए थे। इस लिहाज से जहांगीर के साथ नाइंसाफी ही हुई। उन्हें लुटियंस दिल्ली में जगह नहीं मिली। आपको मिंटो रोड के पास जहांगीर रोड मिलेगी। यह भी छोटी सी सड़क है। यह वहां से शुरू होती है, जहां पर छत्रपति शिवाजी की मूर्ति लगी है। यह सड़क गांधी मार्केट तक जाती है।मुगलों का पतन शुरू हुआ जब उन्होंने मंदिरों पर हमला किया, आज औरंगजेब के वंशज रिक्शा चला रहे हैंः योगी

किस किले में औरंगजेब के अवशेष?


मुगल बादशाह औरंगजेब ने सलीमगढ़ किले को जेल में तब्दील कर दिया था। सलीमगढ़ किले में कई नामवर हस्तियां कैद में रहीं। कहा जाता है कि औरंगजेब ने अपने सबसे छोटे भाई मुराद बख्श और बेटी जेबुन्निसा को सलीमगढ़ में कैद करके रखवाया। इधर ही दारा शिकोह को भी कैद में रखा गया था। सलीमगढ़ किले को शेरशाह सूरी के पुत्र सलीम शेरशाह सूरी ने 1546 में बनवाया था। इसे तामीर करवाने के पीछे मकसद था कि दिल्ली को विदेशी आक्रमणकारियों के हमलों से सुरक्षित रखा जा सके। इसके एक तरफ यमुना नदी बहती थी और दूसरी तरफ अरावली की पहाड़ियां थीं। सलीमगढ़ का किला लाल किले से सटा ही है। लाल किले के विपरीत इसके अंदर जाने पर उदासी, डर और सन्नाटे के मिल-जुले भाव महसूस होते हैं। सलीमगढ़ के किले की शानदार संरचना त्रिभुजाकार है और इसकी दीवारों बड़े ही खुरदरे पत्थरों और ईंटों से बनी हैं।

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औरंगजेब, ईदगाह मैदान और दारा शिकोह

औरंगजेब का शासन 1658 से 1707 के दरम्यान रहा। औरंगजेब को विस्तारवादी बादशाह के रूप में जाना जाता है। औरंगजेब का राजधानी के ईदगाह मैदान से भी संबंध है। सदर बाजार में ईदगाह को कदिमी शाही ईदगाह भी कहते हैं। इसे औरंगजेब ने 1658 में तामिर करवाया था। इस बीच, शाहजहां के दूसरे पुत्र औरंगजेब ने अपने पिता को सिंहासन से हटाकर उन्हें आगरा में कैद कर दिया था। उसके बाद औरंगजेब ने अपने बड़े भाई दारा शिकोह का सिर कटवा दिया था और फिर आदेश दिया था कि उनके कटे हुए शरीर को हुमायूं के मकबरे के आंगन में दफना दिया जाए। भारत सरकार हुमायूं के मकबरे के परिसर में दारा शिकोह की कब्र को तलाश रही है। दारा शिकोह को हुमायूं के मकबरे में कहीं दफन किया गया था। भारत सरकार ने दारा की कब्र को पहचानने के लिए पुरातत्वविदों की एक कमिटी बनाई है, जो साहित्य, कला और वास्तुकला के आधार पर उनकी कब्र की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

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