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प्रवासी राजस्थानी SIR से परेशान, नाम हटाए: बोले- हम कम पढ़े-लिखे, न वोटर लिस्ट का पता-न फॉर्म भरा, अब वोट कहां रखेंगे? – Rajasthan News

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प्रवासी राजस्थानी SIR से परेशान, नाम हटाए:  बोले- हम कम पढ़े-लिखे, न वोटर लिस्ट का पता-न फॉर्म भरा, अब वोट कहां रखेंगे? – Rajasthan News

प्रवासी राजस्थानी SIR से परेशान, नाम हटाए: बोले- हम कम पढ़े-लिखे, न वोटर लिस्ट का पता-न फॉर्म भरा, अब वोट कहां रखेंगे? – Rajasthan News

‘मैं पिछले 10 साल से तमिलनाडु के शूलागिरी में ग्रेनाइट फैक्ट्री में मशीन ऑपरेटर का काम कर रहा हूं, मुझे 2-3 दिन पहले ही गांव से फोन आया कि जल्दी से फॉर्म भरने आ जाओ, नहीं तो वोटर लिस्ट से नाम कट जाएगा…यहां वोटर लिस्ट अपडेट ( SIR) हो रही है, मैं ज्य

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नागौर के जायल निवासी राकेश सिंह की तरह लाखों प्रवासी राजस्थानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया (SIR) के दौरान असमंजस के दौर से गुजर रहे हैं।

4 दिसंबर तक सभी को फॉर्म भरकर जमा करवाना है, ताकि वोटर लिस्ट से नाम नहीं कटे। लेकिन कई प्रवासियों को इस प्रक्रिया की जानकारी तक नहीं है।

कारोबार और नौकरियों के चलते लाखों प्रवासी राज्य के बाहर रहते हैं। ज्यादातर अबतक राजस्थान में ही वोट डालने आते रहे हैं, लेकिन कुछ प्रवासियों ने राजस्थान में बीएलओ को SIR फॉर्म जमा करवाने से मना कर दिया है।

ऐसे में अनुमान है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा वोट प्रवासियों के कम हो सकते हैं। कुछ अभी तक यह तय नहीं कर पा रहे कि उन्हें अपने मूल राज्य में वोट रखना है या जहां वे नौकरी कर रहे हैं।

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राजस्थान में सबसे तेजी से अपडेट हो रहा डेटा

केंद्रीय निर्वाचन विभाग की साइट पर शनिवार की रिपोर्ट के अनुसार बड़े राज्यों में सर्वाधिक राजस्थान में 60.54 प्रतिशत फॉर्म डिजिटलाइज्ड हो गए हैं।

बीएलओ और SIR प्रक्रिया से जुड़े कुछ अधिकारियों से बातचीत में सामने आया है कि राजस्थान में SIR प्रक्रिया को लेकर सबसे ज्यादा प्रवासी राजस्थानियों को ही दिक्कतें आ रही हैं।

ये कई साल पहले कारोबार के सिलसिले में प्रदेश से बाहर अलग-अलग राज्यों में बस गए और इनमें से कई वहां के वोटर भी बन गए।

परिवार के आधे सदस्यों के राजस्थान में रहने से यहां भी उनका आना-जाना बना रहता है। यहीं कारण है कि अब SIR प्रक्रिया में उनके लिए बड़ी असमंजस वाली स्थिति बनी हुई है।

हमने SIR प्रक्रिया को लेकर राजस्थान से बाहर रह रहे कुछ प्रवासी कारोबारियों और दूसरे पेशे से जुड़े लोगों से बात की और इससे जुड़ी दिक्कतें समझने की कोशिश की…

‘सूरत में रहने वाले जीवाराम बोले, अब आधे-आधे वोट रख रहे’

राजस्थान के पाली जिले के जीवाराम सीरवी ने बताया कि व्यापार के चलते कई साल पहले वो गुजरात के सूरत शहर में बसे थे। हालांकि राजस्थान से भी मेरा नाता अटूट है।

अब मेरे परिवार में पत्नी, बेटे और बहू के साथ हम 4 लोग वोटर हैं। अभी तक सब कुछ सही से चल रहा था। लेकिन गुजरात व राजस्थान दोनों जगह SIR प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट रिवीजन होने से हमने 2 वोट गुजरात और 2 वोट राजस्थान में रखे हैं। कमोबेश यही हाल लगभग सभी राजस्थानी प्रवासियों के हो गए हैं।’

जीवाराम सीरवी ने बताया कि वे एसआईआर के लिए खासतौर से अपने गांव आए हुए हैं।

उन्होंने बताया कि राजस्थान में बीएलओ बढ़िया काम कर रहे हैं। बेंगलुरू व हैदराबाद में रहने वाले रिश्तेदारों से बात होती है तो, उनमें से किसी को अभी वहां SIR के वोटर लिस्ट रिवीजन के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

उनके जैसे अभी लाखों लोग हैं, जो जानकारी नहीं होने से फॉर्म ही जमा नहीं कर पाए हैं। उनका नाम राजस्थान की वोटर लिस्ट से कट सकता है।’

न रिश्तेदारों ने बताया- न BLO ने, सरकार समय बढ़ाए

राजस्थान के नागौर जिले के लवादर गांव के रहने वाले जेठाराम गुर्जर परिवार के साथ तमिलनाडु के कृष्णागिरी में रहते हैं। वे ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। 15 साल की उम्र से ही ग्रेनाइट इंडस्ट्री में का काम कर रहे हैं। जेठाराम ने बताया कि वो आज भी वोट देने राजस्थान ही जाते हैं।

पूरे परिवार का वोट भी राजस्थान में ही है। हालांकि उन्हें फिलहाल राजस्थान में वोटर लिस्ट अपडेट करने के लिए चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

न ही उन्होंने कोई फॉर्म भरा है। न किसी रिश्तेदार ने और न ही किसी बीएलओ ने अभी इसके बारे में कुछ बताया है।

जेठाराम ने बताया कि उन्हें SIR को लेकर कोई जानकारी नहीं थी।

जब हमने उन्हें वोटर लिस्ट से नाम कटने की बात बताई तो इस पर जेठाराम कहते हैं, ‘मुझे तो आपसे पता चला है। वैसे घर वाले नाम काटने नहीं देंगे।

क्या पता उन्होंने डॉक्यूमेंट जमा करवा दिए हों। इस तरह का मैं अकेला ही नहीं हूं। यहीं अकेले कृष्णागिरी में सैकड़ों राजस्थानी होंगे जिन्हें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बारे में कुछ अता-पता नहीं है।’

राजस्थान में परिवार वालों ने सभी डॉक्यूमेंट्स जमा करवाए, वहीं देंगे वोट

नागौर जिले के सुरेंद्र सिंह राजपुरोहित ने बताया कि उनका तीन भाइयों का परिवार कई सालों से कर्नाटक के बेंगलुरु शहर में रहता है। सभी के अलग-अलग बिजनेस हैं।

जैसे ही उन्हें राजस्थान में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बारे में जानकारी मिली तो वो बेंगलुरु से महज फॉर्म जमा करवाने के लिए ही राजस्थान आए हैं।

एक दिन पहले ही उन्होंने अपने खुद समेत तीनों भाइयों और उनके परिवार के सभी सदस्यों से जुड़े स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) फॉर्म भरकर डॉक्युमेंट्स सहित बीएलओ को जमा करवा दिया है।

हम तो अपना वोट यहीं देंगे।

सुरेंद्र सिंह राजपुरोहित ने बताया कि फिलहाल कर्नाटक में वोटर रिवीजन स्टार्ट नहीं हुआ है।

ऑनलाइन प्रक्रिया के बारे में जानकारी नहीं

राजस्थान से बाहर रहे लोगों को फॉर्म भरवाने के लिए चुनाव आयोग ने ऑनलाइन सुविधा दी है। वे चुनाव आयोग की वेबसाइट या ECINet ऐप पर फॉर्म भर सकते हैं।

वो फॉर्म का प्रिंट निकालकर और उसे भरकर परिवार के किसी सदस्य के जरिए BLO को भेज सकते हैं। इसके अलावा वे भरे गए फॉर्म को वॉट्सऐप के जरिए भी BLO को भेज सकते हैं।

लेकिन लोगों से बातचीत के बाद सामने आया है कि अधिकतर नौकरीपेशा प्रवासी राजस्थानी ऑनलाइन प्रक्रिया से अनजान हैं।

बीएलओ बोले- कुछ ने डिसीजन लिया, कुछ सोच रहे

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रोसेस में काम कर रहे नागौर के बीएलओ राजेंद्र टेलर ने बताया कि जिनके फॉर्म जमा हो रहे हैं, वो उनके परिजनों द्वारा करवाए जा रहे हैं।

हालांकि प्रवासी राजस्थानी SIR को लेकर क्रेज भी दिखा रहे हैं। वहीं, कुछ ने स्पष्ट ही बता दिया है कि वो अब यहां राजस्थान में फॉर्म जमा नहीं करवाएंगे। वहीं, कुछ अभी ये डिसीजन करने में ही लगे हैं कि उन्हें अब आगे वोट कहां जुड़वाना है।

राजस्थान में आयोग जल्दबाजी कर रहा – एक्सपर्ट

चुनाव प्रक्रिया पर करीबी से नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारहठ कहते हैं- इस पूरी प्रक्रिया में चुनाव आयोग से राजस्थान में थोड़ी जल्दबाजी सी हुई लगती है।

वे कहते हैं, ‘ये उम्मीद करना कि प्रदेश से बाहर रहने वाले प्रवासी राजस्थानी जो व्यापारी और नौकरीपेशा हैं, SIR प्रोसेस को वो ऑनलाइन कर लेंगे, ये प्रैक्टिकल नहीं लगता है।

वोटर लिस्ट को ठीक रखना जरूरी है, लेकिन राजस्थान में जो रहा है, वो ऐसे लगता है, जैसे जल्दबाजी से हो रहा है।

प्रवासी या बाहर पढ़ाई करने वाले ऑनलाइन भर सकते हैं फॉर्म – सीईओ

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन NEWS4SOCIALसे बातचीत में कहा- राज्य से बाहर जॉब और पढ़ाई करने वालों को SIR के लिए राज्य में आने की जरूरत नहीं है। जो लोग दूसरे राज्यों में जॉब कर रहे हैं या दूसरे राज्यों में पढ़ाई के लिए गए हुए हैं, ऐसे नौजवान साथियों से अनुरोध है कि उन्हें आने की आवश्यकता नहीं हैं। वे ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। एक सिंपल सा बार कोड है, जिसे स्कैन करना है और आधार ऑथेंटिकेशन के साइन इन के साथ आप अपना गणना पत्र सीधा अपलोड कर सकते हैं।

नवीन महाजन ने बताया कि सुनवाई बिना किसी भी वोटर का नाम नहीं कटेगा

अभी पहला फेज है। एसआईआर के तहत बीएलओ घर-घर जाकर गणना फार्म ले रहे हैं। बीएलओ हर घर पर तीन बार जाएगा। अगर कोई तीन बार में भी नहीं मिला तो उसे नोटिस दिया जाएगा। 9 दिसंबर को SIR की वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट पब्लिकेशन होगा, उसमें घर नहीं मिलने वालों की लिस्ट होगी।

ड्राफ्ट पब्लिकेशन में जिनके नाम नहीं होंगे, उन्हें सुनवाई का मौका दिया जाएगा। वे इसके बाद अपना पक्ष रख सकते हैं, पिछली एसआईआर में नाम है तो प्रमाण देकर नाम जुड़वा सकेंगे। पिछली एसआईआर में नाम नहीं है तो अपने माता-पिता का पिछली एसआईआर में नाम का प्रमाण और खुद का एक आईडेंटिटी प्रूफ देना होगा। ड्राफ्ट पब्लिकेशन में जिनके नाम नहीं होंगे, वे सुनवाई का मौका देने के बाद भी नहीं आएंगे उनके नाम कटेंगे।

पिछली SIR में अपना नाम कैसे देखें –

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प्रदेश की सभी 199 विधानसभा सीटों के हर बूथ की वोटर लिस्ट की गहनता से जांच होगी। हर वोटर को फिर से वेरिफाई किया जाएगा। हर वोटर को फिर से वेरिफाई किया जाएगा।​​​​​​​ पूरी खबर पढ़िए…

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