अब गांवों की सरकारी संपत्ति मोबाइल में होगी, पंचायतों ने शुरू की मैपिंग – Sehore News h3>
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अब गांवों की सरकारी संपत्तियां पंचायतों के डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होंगी। जिले की सभी पंचायतों में यह काम शुरू हो चुका है। हर भवन, सड़क और पाइप लाइन का ब्योरा अब मोबाइल एप पर नजर आएगा। शुरुआत पंचायत और सामुदायिक भवन से होगी। इसके बाद अन्य संपत्तियों की मैपिंग होगी। शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए कदम उठाया है। इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने गाइडलाइन जारी की है। यह कदम ग्रामीण संपत्तियों को एकीकृत डिजिटल सिस्टम के अंतर्गत लाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतें अब अपनी सभी चल और अचल संपत्तियों का ब्यौरा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के “पंचायत दर्पण” एप के परिसंपत्ति प्रबंधन पोर्टल पर दर्ज करेंगी। इसमें पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, स्कूल भवन, पाइपलाइन, सड़क, पुल-पुलिया, ओवरहेड टैंक, स्टापडेम जैसी सभी सार्वजनिक संरचनाएं शामिल होंगी। हर संपत्ति के साथ उसका जियो टैग फोटो, निर्माण वर्ष, स्थान चिन्हांकन और तकनीकी विवरण दर्ज किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया सरपंच और सचिव मिलकर पंचायत के अपने लॉगइन आईडी के माध्यम से करेंगे। पंचायतों की संपत्तियों की मैपिंग का कार्य मुख्य रूप से केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना और राज्य सरकार के पंचायत दर्पण पोर्टल पहल का हिस्सा है। जिले की 5 जनपद पंचायतों के अंतर्गत कुल 542 ग्राम पंचायतें हैं।
सभी विभागों की संपत्तियां पंचायत के दायरे में आएंगी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिला पंचायत सीईओ को पत्र भेजकर निर्देश दिए हैं कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अलावा अन्य विभाग जैसे आईएस, पीएचई, जल निगम, लोक निर्माण विभाग की संपत्तियों को भी इस डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल किया जाए। अब ग्राम पंचायत क्षेत्र की कोई भी सरकारी संपत्ति बिना मालिक या अनियंत्रित स्थिति में नहीं रहेगी। जिले में पंचायत भवनों, सामुदायिक भवनों और प्रमुख सार्वजनिक संरचनाओं का सर्वे और जियो टैगिंग का काम 50 फीसदी से ज्यादा पूरा हो गया है। इसके बाद अन्य विभागों की संपत्तियों की मैपिंग होगी।
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अब गांवों की सरकारी संपत्तियां पंचायतों के डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज होंगी। जिले की सभी पंचायतों में यह काम शुरू हो चुका है। हर भवन, सड़क और पाइप लाइन का ब्योरा अब मोबाइल एप पर नजर आएगा। शुरुआत पंचायत और सामुदायिक भवन से होगी। इसके बाद अन्य संपत्तियों की मैपिंग होगी। शासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए कदम उठाया है। इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने गाइडलाइन जारी की है। यह कदम ग्रामीण संपत्तियों को एकीकृत डिजिटल सिस्टम के अंतर्गत लाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतें अब अपनी सभी चल और अचल संपत्तियों का ब्यौरा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के “पंचायत दर्पण” एप के परिसंपत्ति प्रबंधन पोर्टल पर दर्ज करेंगी। इसमें पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, स्कूल भवन, पाइपलाइन, सड़क, पुल-पुलिया, ओवरहेड टैंक, स्टापडेम जैसी सभी सार्वजनिक संरचनाएं शामिल होंगी। हर संपत्ति के साथ उसका जियो टैग फोटो, निर्माण वर्ष, स्थान चिन्हांकन और तकनीकी विवरण दर्ज किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया सरपंच और सचिव मिलकर पंचायत के अपने लॉगइन आईडी के माध्यम से करेंगे। पंचायतों की संपत्तियों की मैपिंग का कार्य मुख्य रूप से केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना और राज्य सरकार के पंचायत दर्पण पोर्टल पहल का हिस्सा है। जिले की 5 जनपद पंचायतों के अंतर्गत कुल 542 ग्राम पंचायतें हैं।
सभी विभागों की संपत्तियां पंचायत के दायरे में आएंगी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिला पंचायत सीईओ को पत्र भेजकर निर्देश दिए हैं कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अलावा अन्य विभाग जैसे आईएस, पीएचई, जल निगम, लोक निर्माण विभाग की संपत्तियों को भी इस डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल किया जाए। अब ग्राम पंचायत क्षेत्र की कोई भी सरकारी संपत्ति बिना मालिक या अनियंत्रित स्थिति में नहीं रहेगी। जिले में पंचायत भवनों, सामुदायिक भवनों और प्रमुख सार्वजनिक संरचनाओं का सर्वे और जियो टैगिंग का काम 50 फीसदी से ज्यादा पूरा हो गया है। इसके बाद अन्य विभागों की संपत्तियों की मैपिंग होगी।




