टीनएज में पिता की राइफल से की पहली हत्या: फिर 9MM की गोलियों को बनाया ब्रांड, शेरू का साथ मिलते ही चंदन ने चलाया गैंग – Buxar News h3>
2007 से अब तक गंगा में काफी पानी बह चुका है। कइयों की अस्थियां गंगा में प्रवाहित हुईं, तो कुछ की अस्थियां दो गज जमीन के नीचे हैं। सोनू मिश्रा, नौशाद, भरत राय, हैदर इमाम वारसी, शिवजी खरवार, निजामुद्दीन, राजेंद्र केशरी। ये लोग चंदन-शेरू की पिस्टल से नि
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बक्सर के सोनवर्षा क्रिकेट ग्राउंड से शुरू कहानी पटना के पारस अस्पताल में खत्म हुई। क्रिकेट खेलने के दौरान गांव के ही सोनू मिश्रा से झगड़ा हो गया। चंदन इसकी शिकायत करने सोनू के घर गया। वहां उसकी पिटाई कर दी गई। वापस घर आया।
पिता की लाईसेंस राइफल उठाई और सोनू मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी। लोगों ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। इंटर कॉमर्स के स्टूडेंट के अपराध की राह पकड़ने की शुरुआत यहीं से हुई। साढ़े तीन साल जेल में रहा।
इसके बाद घर वालों ने नाबालिग होने का प्रमाण दिया तो उसे सीजेएम ने रिमांड होम भेज दिया। बक्सर कोर्ट में पेशी के दौरान अक्टूबर 2010 में चंदन फरार हो गया। फरार होने में जिस शख्स ने मदद की थी, वह अभी भी चंदन के खास दोस्तों में एक था। कोर्ट के बाहर बाइक लेकर खड़ा था। चंदन उसके घर चला गया। वहां दो महीने रहा।
बक्सर, आरा से बंगाल तक खौफ
साढ़े तीन साल तक जेल में रहने के दौरान चंदन मिश्रा के कई दोस्त बने। 2011 के जनवरी में शेरू सिंह जेल से छूटकर आया तो दोनों की पहली मुलाकात उसी शख्स के घर हुई, जिसने उसे जेल से भगाने में मदद की थी। चंदन व शेरू एक हुए। दोनों को एक दूसरे का साथ मिला।
अगले कुछ ही दिनों में क्राइम की दुनिया में चंदन-शेरू का नाम खौफ का पर्याय बन गया। बक्सर, फिर आरा और उसके बाद बंगाल तक इस जोड़ी ने कहर बरपाया। नाइन एमएम की पिस्टल से सिर में गोली मारे जाने की कोई भी वारदात होती, पुलिस का शक पहले चंदन शेरू पर जाता था।
दोनों के साथ कुछ अन्य लोग मिले। एक-एक कर विरोधियों को ठिकाने लगाने की योजना बनाते रहे। योजनाएं अंजाम तक पहुंचती रहीं। बिना किसी चूक के। चलती बाइक से सिर में नाइन एमएम की गोली उतारना इनका ‘मोडस आपरेंडी’ या कहें ब्रांड बन गया। दोनों की महत्त्वाकांक्षा अपराध की दुनिया में बड़ा नाम बनने की थी। ऐसा हुआ भी। पर इस खेल में पैसा व पावर आया तो दूरियां बढ़ने की शुरुआत भी हो गई।
पूर्व मुखिया नौशाद बना चंदन-शेरू की जोड़ी का पहला शिकार
खैर अभी बात 2011 के सीरियल किलिंग के दौर की। चंदन-शेरू की जोड़ी का पहला मर्डर नया भोजपुर पंचायत (बक्सर) के पूर्व मुखिया नौशाद का था। चंदन के इकबालिया बयान के मुताबिक नौशाद चंदन के गांव के ही एक शख्स से मिलकर चंदन मिश्रा व शेरू सिंह की हत्या कराना चाहता था। इलियास मियां लाइनर का काम कर रहा था।
हालांकि, चंदन या शेरू नौशाद को नहीं पहचानते थे। पहचान कराने के लिए अपने एक सहयोगी की मदद ली। बक्सर के चर्चित मुनीम चौक के पास एक स्पोर्ट्स गुड्स की नामी दुकान में बैठे नौशाद की पहचान सहयोगी ने करा दी।
वहां से चलते ही दोनों ने अपने एक सहयोगी के साथ नौशाद का बाइक से पीछा किया। हाईवे पर एस्सार पेट्रोल पंप के पास ओवरटेक कर नौशाद के सिर में नाइन एमएम की गोलियां उतार दीं। दोनों के पास नाइन एमएम की पिस्टल थी।
गवाह को धमकाना था तो बसों पर गोलियां बरसाई
नौशाद हत्याकांड के बाद दूसरी वारदात अनिल सिंह हत्याकांड के एक गवाह को धमकाने की थी। दोनों ने सहयोगियों के साथ मिलकर दुल्लहपुर में दवा दुकान के समीप खड़ी चार बसों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। दवा दुकान के शटर को भी छलनी कर दिया, जो उसी गवाह की थी।
इस वारदात के बाद अनिल सिंह हत्याकांड का गवाह मुकर गया। इसके बाद अप्रैल 2011 में सोनवर्षा के भरत राय की हत्या हुई। चंदन का मानना था कि सोनू मिश्रा हत्याकांड के गवाहों को गवाही के लिए चढ़ा रहा था, जिससे कोर्ट में सुलह में कठिनाई हो रही थी। बक्सर टेम्पो स्टैंड से पीछा कर उसे दुधारचक मोड़ पर मारा गया था। इस हत्याकांड के दूसरे दिन दोनों पटना चले गए। पटना में एक दिन रुकने के बाद हावड़ा चले गए।
जेलकर्मी ने सेल में डाला था, ड्यूटी से लौटते मार डाला
मई महीने में बक्सर सेंट्रल जेल के क्लर्क इमाम वारसी का नंबर था। जेल से ड्यूटी कर लौटते वक्त उसे बक्सर धोबीघाट के पास मारा गया। 4 मई 2011 की घटना है। चंदन के मुताबिक हैदर इमाम वारसी का कसूर यह था कि जेल में उसने दोनों को प्रताड़ित किया था और सेल में बंद कर दिया था। जुलाई में ही सिमरी की प्रखंड प्रमुख के पति शिवजी खरवार की हत्या हुई। शिवजी खरवार की ससुराल चंदन मिश्रा के गांव में ही थी।
वहां शिवजी के किसी मामले में शिवजी को समझाने के लिए चंदन ने फोन किया व डांट-डपट की तो उसने गाली दे दी। गाली के बदले उसे गोली मिली। 26 जुलाई को बीयर बार में बीयर पी रहे शिवजी खरवार की लाइन चंदन को लाइन दे दी। शिवजी खरवार का दोनों ने पड़री मोड़ पर इंतजार किया। वहां से पीछा कर बिजुलिया बाबा स्थान के पास चलती मोटरसाइकिल से गोली मारकर हत्या कर दी। वहां से ट्रेन से पटना पहुंचे। फिर हावड़ा चले गए।
संतोष ओझा की हत्या का बदला इस्लाम मियां के बेटे को मारकर लिया
शिवजी खरवार की हत्या के तीन दिन बाद ही इस्लाम मियां के बेटे की हत्या कर दी। इस्लाम मियां के बेटे निजामुद्दीन की हत्या बक्सर बस स्टैंड के पास की गई थी। वह बस का खलासी था। बदला इस्लाम मियां से लेना था। निशाना उसका बेटा बना।
इस्लाम मियाां का नाम चर्चित संतोष ओझा हत्याकांड के बाद सुर्खियों में आया था। चंदन ने पुलिस को बयान दिया कि हमने संतोष ओझा की हत्या का बदला इस्लाम के बेटे की हत्या कर लिया। इस हत्या के बाद भी दोनों पटना चले गए। हालांकि उनके साथ उनका एक तीसरा साथी भी था, जो यूपी भागा था। वहां वह गोरखपुर में हथियार के साथ पकड़ा गया। यह सूचना मिलने के बाद चंदन व शेरू हावड़ा भाग गए।
चंदन मिश्रा की फाइल फोटो।
चूना व्यवसायी की हत्या के बाद हावड़ा भागे चंदन-शेरू
इन हत्याओं के बाद चंदन-शेरू का बक्सर में खौफ हो गया था। यहां से शुरू हुआ व्यवसायियों से रंगदारी मांगने का सिलसिला। दोनों वापस बक्सर आए। कृतपुरा के पास सड़क किनारे खड़े होकर बक्सर के बड़े व्यवसायियों को रंगदारी के लिए कॉल किया। कुछ लोगों ने इन कॉल्स को हल्के में लिया तो कुछ ने गाली-गलौज भी कर दिया। अगले दिन दोनों अपने एक साथी के साथ, जो बाइक चला रहा था, बक्सर के भोजपुर चूना भंडार पहुंचे।
दोनों बाइक से उतरकर भोजपुर चूना भंडार के मालिक राजेंद्र केशरी को भून डाला। इसके बाद दोनों रघुनाथपुर से ट्रेन पकड़कर पटना चले गए। चंदन पटना से बनारस गया और शेरू हावड़ा। पुलिस दबिश बढ़ी तो चंदन भी हावड़ा चला गया। वहां से इन लोगों ने फिर व्यवसायियों से रंगदारी मांगी। इस बार उनके खौफ का असर हो चुका था। चंदन ने पकड़े जाने के बाद पुलिस को बताया था कि वे लोग कोई भी सिम एक सप्ताह से ज्यादा यूज नहीं करते थे।
कोलकाता के व्यवसायियों से भी रंगदारी मांगने का क्रम शुरू किया। इधर बक्सर के पुलिस कप्तान दलजीत सिंघ के नेतृत्त्व वाली पुलिस टीम इन वारदातों के बाद पूरे दबाव में थी। जिले की पुलिस चंदन-शेरू को ढूंढ़ने में लगी थी। चूना व्यवसायी की हत्या के बाद पुलिस पर काफी दबाव था। अचानक एक दिन पुलिस को सटीक इनपुट मिला। बक्सर से एसआई अवधेश कुमार के नेतृत्व में हावड़ा गई पुलिस टीम ने रानी रासमणि एवेन्यू से दोनों को धर दबोचा। उसके बाद से ही चंदन मिश्रा सलाखों के पीछे था। हालांकि जेल की दीवारें उसके व शेरू के बढ़ते प्रभाव को नहीं रोक सकीं। इस गैंग के पास पैसा, पावर और शागिर्दों की संख्या बढ़ती गई।




