मंगलवार, 28 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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नंबर की तरह बैंक खाते भी हो सकेंगे पोर्ट।

मोबाइल नंबर की तरह सरकार अब ग्राहकों को बैंक खाता एक से दूसरे बैंक में ले जाने की सुविधा देने की तैयारी कर रही है।

नंबर की तरह बैंक खाते भी हो सकेंगे पोर्ट।
मोबाइल नंबर की तरह सरकार अब ग्राहकों को बैंक खाता एक से दूसरे बैंक में ले जाने की सुविधा देने की तैयारी कर रही है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एसएस मूदंडा ने सोमवार को एक कार्यक्रम में बैंको से इसकी तैयारी करने को कहा है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि अकाउंट नंबर की पोर्टिबिलिटी से बैंको के बीच ग्राहकों को बेहतर सेवा देने की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। मूदंडा ने कहा कि बैंकों को नई पीढ़ी के ग्राहकों को विकल्प देने चाहिए। लेकिन अगर उपभोक्ता बैंक की सेवाओं से असंतुष्ट है तो उसे बिना खाता नंबर बदले एक बैंक से दूसरे बैंक में जाने की सुविधा मिलनी चाहिए। तकनीकी उन्नयन के कारण ऐसा करना मुश्किल नहीं है। रिजर्व बैंक के पहले जारी दिशानिर्देशों में कहा गया है कि बैंक बदलने के दौरान ग्राहक की लेनदेन संबंधी या निजी जानकारी गोपनीय ही रहेगी। ग्राहक की डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड के लेनदेन का डाटा सुरक्षित रहेगा। इससे बैंक खातों का एक जगह डेटाबेस तैयार होने से आयकर विभाग और राजस्व से जुड़े अन्य विभागों को भी जांच में सहूलियत होगी। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के उप प्रबंध निदेशक नीरज व्यास के मुताबिक़, पोर्टिबिलिटी की सुविधा के लिए खातों के अंक एकसमान होने जरूरी है। हालांकि, रिजर्व बैंक का मनाना है की आधार नंबर बैंक खातों से जुड़ जाने से अकाउंट पोर्टिबिलिटी की सुविधा देना कठिन नहीं है। खाताधारकों की अड़चनें अभी खाताधारकों को खाता नंबर के अलावा आईएफएससी कोड, मोबाइल मनी आइडेंटीफायर, कस्टमर रिलेशनशिप नंबर जैसे कई आंकड़ों को रखना पड़ता है लेकिन खाता पोर्टिबिलिटी की सुविधा के बाद सिर्फ बैंक खाता नंबर से ही पहचान हो जाएगी। वर्तमान में ग्राहक खाता एक बैंक दूसरे बैंक में स्थानांतरित करना चाहता है तो बैंक उसे मौजूद खाता बंद कर दूसरा खाता खोलने की सलाह देते है। आधार से समस्या नहीं आएगी मूदंडा ने कहा कि बैंक को आधार से जुड़ने के कारण पोर्टिबिलिटी में समस्या नहीं आएगी। केंद्रीय भुगतान सिस्टम के तौर पर नेशनल पेमेंट कारपोरेशन (एनपीसीआई) कि भी इसमें अहम भूमिका होगी। बैंकों की मनमानी रुकेगी
  • इससे ग्रहको को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलेंगी।
  • बैंको की मनमानी के खिलाफ ग्राहकों को विकल्प मिलेगा।
  • आधार या मोबाइल एप से लेनदेन में आसानी होगी।
आपको बता दें, अभी बीमा और दूरसंचार क्षेत्र में पोर्टिबिलिटी की सुविधा उपलब्ध है। दूरसंचार कमपनी बदलने के बावजूद नंबर नहीं बदलता है।
NJ

Neha Jangra

नेहा जांगड़ा News4Social की बिज़नेस संवाददाता हैं। वे व्यापार, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय खबरों को कवर करती हैं, और आर्थिक मुद्दों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुँचाती हैं। सभी लेख देखें →

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