मुनाफे के नए शिखर पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, एक साल में कमाए 10,000 करोड़ रुपए से ज़्यादा
देश के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) ने अपने वित्तीय प्रदर्शन में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि वित्त वर्ष 2025-26 में इन बैंकों ने कुल मिलाकर 10,177…
देश के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) ने अपने वित्तीय प्रदर्शन में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि वित्त वर्ष 2025-26 में इन बैंकों ने कुल मिलाकर 10,177 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड शुद्ध लाभ दर्ज किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह इन बैंकों का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह आँकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में RRBs की वित्तीय सेहत में लगातार और उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। मुनाफे के अलावा, बैंकों ने दूसरे कई अहम वित्तीय पैमानों पर भी बेहतर प्रदर्शन किया है।
कर्ज और संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार
आँकड़ों के मुताबिक, बैंकों की संपत्ति की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (Gross NPA) यानी फँसा हुआ कर्ज, वित्त वर्ष 2023-24 के 6.1 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025-26 में 5.4 प्रतिशत रह गया है। इसी दौरान, इन बैंकों की नेटवर्थ भी तेजी से बढ़ी है। यह वित्त वर्ष 2023-24 के 63,927 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 74,086 करोड़ रुपए पहुँच गई है। उससे पहले के वर्ष में यह 56,780 करोड़ रुपए थी।
सरकार की निगरानी और समीक्षा
पंकज चौधरी ने सदन को बताया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तरों पर नियमित रूप से इन बैंकों के कामकाज की समीक्षा करती है। वित्त मंत्रालय का वित्तीय सेवा विभाग समय-समय पर RRBs और उनके प्रायोजक बैंकों के साथ बैठकें आयोजित करता है।
उन्होंने कहा, "इन समीक्षा बैठकों में बैंकों के वित्तीय प्रदर्शन का आकलन करने के साथ-साथ तकनीकी उन्नयन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में ऋण विस्तार, कृषि एवं कृषि से जुड़े क्षेत्रों, एमएसएमई और रिटेल लोन पोर्टफोलियो के विविधीकरण पर विशेष जोर दिया जाता है।" इसके अलावा, सरकार प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) और अटल पेंशन योजना (APY) जैसी प्रमुख योजनाओं के लिए भी लक्ष्य निर्धारित करती है और उनकी प्रगति पर नजर रखती है, ताकि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में वित्तीय समावेशन को और मजबूत किया जा सके।
इनपुट: IANS



