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दिल्ली जल बोर्ड घोटाला: सत्येंद्र जैन की गिरफ़्तारी पर AAP, BJP और कांग्रेस आमने-सामने

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जुड़े कथित घोटाले के मामले में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ़्तारी ने राजधानी दिल्ली की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) की इस कार्रवाई के बाद…

दिल्ली जल बोर्ड घोटाला: सत्येंद्र जैन की गिरफ़्तारी पर AAP, BJP और कांग्रेस आमने-सामने
(फोटो: IANS)

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जुड़े कथित घोटाले के मामले में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की गिरफ़्तारी ने राजधानी दिल्ली की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। एंटी-करप्शन ब्रांच (ACB) की इस कार्रवाई के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर यमुना सफाई के नाम पर दिल्ली की जनता को धोखा देने का आरोप लगाया है। वहीं, कांग्रेस ने भी टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं की बात कही है।

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समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आरोप लगाया कि यह एक बड़ा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) घोटाला है। उन्होंने कहा, "यमुना की सफाई के नाम पर अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की जनता को धोखा दिया। उस समय एसटीपी प्लांट लगाने की बात हुई थी। लेकिन 2021 में निकाले गए टेंडर में जानबूझकर एक शर्त जोड़ी गई ताकि एक खास कंपनी, यूरोटेक, को फायदा हो सके।" सचदेवा ने दावा किया कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, मुख्यमंत्री केजरीवाल का नाम भी सामने आएगा।

विपक्ष के आरोप और आप सरकार पर निशाना

इस मामले में कांग्रेस ने भी AAP सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। रचनात्मक कांग्रेस के चेयरपर्सन संदीप दीक्षित ने कहा कि उन्हें इन टेंडरों और घोटाले की जानकारी पहले से थी। उन्होंने याद दिलाया, "जब कांग्रेस सरकार सत्ता में थी, तो यमुना की सफाई के मुख्य पहलुओं... को लेकर उन पर इंटरसेप्टर लगाने की योजना बनाई गई थी... कांग्रेस के कार्यकाल में, जहां तक मुझे याद है, दो या तीन बड़े इंटरसेप्टर लगाए जाने थे।"

दीक्षित ने आरोप लगाया, "लेकिन केजरीवाल की सरकार बनने के बाद उन्होंने उसे रिटेंडर में डाल दिया। जब सरकार 5 रुपये की चीज को 10 रुपये की करके रिटेंडर करने लगे तो समझ जाइए की कुछ न कुछ तो गड़बड़ है।" उनके अनुसार, इन्हीं अनियमितताओं के कारण अब ये लोग फंसे हैं।

एजेंसियों की कार्रवाई पर भी उठे सवाल

हालांकि, विपक्षी दलों के बीच जांच एजेंसियों की भूमिका को लेकर मतभेद भी दिखे। कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि अगर एजेंसी कार्रवाई करती है तो उसके पास पुख्ता सबूत होने चाहिए। उन्होंने कहा, "2014 से हम देख रहे हैं कई एजेंसियां भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर काम करती दिख रही हैं... अगर भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत हैं तो निश्चित तौर पर सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार किया जाना चाहिए, लेकिन अगर राजनीतिक आरोप हैं और कोई प्रमाण नहीं है तो राजनीतिक प्रतिशोध यह बहुत गलत है।"

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने भी लखनऊ में इस कार्रवाई को "प्रतिशोधात्मक राजनीति" करार दिया। उन्होंने कहा, "भारतीय जनता पार्टी प्रतिशोधात्मक राजनीति करती है। उसके पास कुछ भी देने के लिए खुद नहीं है।"

इनपुट: IANS

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News4Social दिल्ली डेस्क

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