क्या भारत को कर्ज़दार बनाएंगी ‘बुलेट ट्रेन’?

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bullet train
क्या भारत को कर्ज़दार बनाएंगी 'बुलेट ट्रेन'?

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट भारत के विकास पर एक अच्छा असर डालने वाला है. इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही भारतीय रेलवे विश्व स्तर पर आगे आएगी. 125 करोड़ आबादी वाले भारत देश में बुलेट ट्रेन एक ऐसा सपना है जो जल्द ही हकीकत में तब्दील हो जाएगा.

केंद्र की मोदी सरकार ने यह तय किया है कि पूर्व निर्धारित 2023 की जगह बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को 15 अगस्त 2022 तक पूरा कर दिया जाएगा. इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए भारत और जापान दोनों मिलकर अपनी पूरी ताकत लगा रहें है.

बुलेट ट्रेन के लिए जापान देगा पैसे और टेक्नोलॉजी
सभी बखूबी जानते है कि बुलेट ट्रेन को हकीकत में तब्दील करना इतना आसान काम नहीं है. वजह है इसमें होने वाला भारी भरकम खर्च और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी. अहमदाबाद और मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन चलाने के लिए लगभग 1,08,000 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया जा रहा है. भारत और जापान के बीच गहरे संबंधों के चलते यह दोनों दिक्कतें खत्म हो गई हैं. जापान ने पहले ही भारत को 88 हजार करोड़ रुपये बतौर कर्ज देने पर सहमति जता दी है. खास बात यह है कि इस कर्ज पर ब्याज न के बराबर है.

दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने करीबन 980 अरब रुपए की रेल परियोजनाओं पर सहमति का ऐलान किया है. बुलेट ट्रेन शुरू करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी का प्रमुख चुनावी वादा रहा है.

इसी के साथ इस कर्ज को भारत 50 साल में जापान को चुकाना होगा. बुलेट ट्रेन के लिए दिए गए इस कार्य पर 0.1 फीसदी का ब्याज होगा. इसके अलावा जापान से मिले इस कर्ज में एक सहूलियत यह भी है कि कर्ज को अदा करने में 15 साल का ग्रेस पीरियड है. इसका मतलब यह हुआ कि बुलेट ट्रेन के लिए मिले कर्ज की किस्त बुलेट ट्रेन शुरू होने के 15 साल बाद शुरू होगी.

आईए जानते है कि क्या है बुलेट ट्रेन की खूबियां
देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर का फासला तय करेगी. यह दूरी महज 2 घंटे में पूरी की जाएगी. इस रूट पर 12 रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे. मुंबई और अहमदाबाद के बीच बनने जा रहा बुलेट ट्रेन रूट ज्यादातर जगहों पर एलिवेटेड होगा. इसी के साथ 7 किलोमीटर का हिस्सा मुंबई में समंदर के नीचे से होकर गुजरेगा.

बता दें कि जापान यह तकनीक कई देशों को बेचने की कोशिश कर रहा है पर हाल ही में उसने इंडोनेशिया में चीन के हाथों मात खाई है. अब तक जापान ने अपनी बुलेट ट्रेन तकनीक सफलतापूर्वक ताईवान को बेची है और अब भारत इसे ख़रीदने वाला दूसरा देश हो गया है.

बुलेट ट्रेन को चलाने की ट्रेनिंग देगा जापान
भारत और जापान के बीच हुए समझौते के मुताबिक अहमदाबाद मुंबई बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में जापान पूरा तरह से तकनीकी सहयोग देगा. वहीं प्रोजेक्ट को बनाने के बाद भी भारत के लोगों को बुलेट ट्रेन चलाने की ट्रेनिंग देगा और इसके अलावा बुलेट ट्रेन तकनीक का भारत के दूसरे इलाकों में इस्तेमाल करने के लिए भी पूरी मदद करेगा. बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए हाई स्पीड रेल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट बड़ोदरा में बनाया जा रहा है. इस इंस्टिट्यूट में बुलेट ट्रेन की ऑपरेशंस और मेंटेनेंस के लिए 4000 लोगों को ट्रेनिंग दी जाएगी. इस ट्रैन के आने नौकरी में भी बढ़ोतरी होगी.

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अब सवाल ये उठते है कि भारत बुलेट ट्रैन का कर्ज कैसे चुकाएंगा? क्या बुलेट ट्रेन को इतने नियमित ग्राहक मिल पाएंगे? क्या यह भारतीय रेलवे पर हमेशा के लिए बोझ नहीं बनेगा?