आखिर क्यों पड़ा उत्तर प्रदेश के इस शहर का नाम लखनऊ

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उत्तर प्रदेश: आज हम आपको उत्तर प्रदेश के सबसे खूबसूरत शहर लखनऊ के बारे में कुछ ऐसा बताने जा रहें है जिसके बारे में शायद ही आप जानते हो. क्या आपको पता है आखिर लखनऊ का नामकरण कैसे हुआ अगर नहीं तो चलिए जानते है इसके बारे में …..

लखनऊ का नामकरण अयोध्या के राजा रामचन्द्र के छोटे भाई लखनलाल के नाम पर हुआ

QUORA से मिली जानकारी के अनुसार, लखनऊ का नामकरण अयोध्या के राजा रामचन्द्र के छोटे भाई ‘लखनलाल’ या ‘लक्ष्मण’ के नाम पर हुआ है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, अयोध्या नरेश राम ने यह क्षेत्र अपने भाई लक्ष्मण को सौंप दिया था. लक्ष्मण ने गोमती नदी के तट पर सुरम्य नगर बसाया जिसे ‘लक्ष्मण पुरी’ या ‘लखन पुरी’ कहा जाने लगा इसे आगे चलकर लखनऊ के नाम से मनोनीत किया जाने लगा.

 

नगर के पुराने भाग में एक ऊंचा टीला  है, जिसे आज भी ‘लक्ष्मण टीला’ के नाम से जाना जाता है. जैन ग्रंथ भगवती सूत्र और बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय के मुताबिक, षोडस महाजनपदों में कोशल व मगध सबसे बड़े और सबसे प्रभावशाली राज्य थे. कोशल की राजधानी अयोध्या व श्रावस्ती थी. कोशल महाजनपद ही आगे चलकर अवध प्रांत के रूप में जाना गया.

अवध प्रांत का नाम बदलकर 1950 में उत्तर प्रदेश रखा गया

आपको बता दें कि अवध की राजधानी पहले फ़ैज़ाबाद थी जिसे लखनऊ स्थानांतरित किया गया इसके अंतिम नवाब वाज़िद अली शाह थे, उनके कार्यकाल के समय लखनऊ स्थापत्य कला व सांस्कृतिक साहित्यिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र था. ब्रिटिश काल में संयुक्त प्रांत आगरा एवं अवध की राजधानी इलाहाबाद से लखनऊ 1920 में स्थानांतरित की गई. अवध प्रांत का नाम बदलकर 1950 में उत्तर प्रदेश रखा गया जिसकी राजधानी लखनऊ बनी. ये ही वजह है आज लखनऊ अपनी विशिष्ट तहजीब, कपड़े आदि चिजों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है.

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