मौर्य साम्राज्य को भारतीय इतिहास में मील का पत्थर क्यों माना जाता है

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अशोक स्तंभ
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मौर्य साम्राज्य की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य के द्वारा की गई थी. जिसमें उनके गुरू चाणक्य या कौटिल्य ने उनका बहुत सहयोग किया था. जहां तक इस साम्राज्य की शुरूआत की बात है तो यह वर्तमान बिहार और बंगाल से शुरू हुआ था. जिसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी. वर्तमान में पाटलिपुत्र को पटना के नाम से जाना जाता है.

बताया जाता है कि 322 ई.पूं. चंद्रगुप्त मौर्य ने नंद वंश के शासक धनानंद की हत्या कर इस वंश की स्थापना की थी. धीरे- धीरे यह वंश बहुत बड़े क्षेत्र में फैल गया.

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मौर्य साम्राज्य को भारतीय इतिहास में मील का पत्थर भी कहा जाता है. उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि भारतीय इतिहास में मौर्य साम्राज्य से पहले कभी इतना ब़ड़े क्षेत्र पर किसी एक वंश के शासको ने शासन नहीं किया. इसके अलावा मौर्य काल से हमें चंद्रगुप्त के गुरू और महान् राजनीतिज्ञ चाणक्य द्वारा लिखी गई सुप्रसिद्ध पुस्कत अर्थशास्त्र से इतिहास की बहुत महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है.

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चाणक्य

मौर्य वंश के ही एक और महान् शासक सम्राट अशोक ने अनेंक शिलालेख लिखवाएं. जिनके आधार पर हमें उस समय का इतिहास लिखने में बहुत सहायता मिलती है. मौर्य साम्राज्य से पूर्व हमें 16 महाजनपदों का वर्णन मिलता है. जब भारत पर छोटे – छोटे क्षेत्रों पर अनेंक राजा शासन करते थे. लेकिन एक साम्राज्य के रूप में भारत मौर्य काल में ही सामने आया.

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मौर्य साम्राज्य की राजनीतिक स्थिरता और एकीकृत केंद्र सरकार के कारण आर्थिक समृद्धि को प्रोत्साहन मिला तथा व्यापार और वाणिज्य का विकास हुआ. जब भी हम भारत के इतिहास का अध्ययन करते हैं, तो उसमें मौर्य साम्राज्य का अपना विशेष महत्व है. मौर्य साम्राज्य के समय हुए परिवर्तनों को महत्व को देखते हुए. मौर्य साम्राज्य के समय को हम भारत इतिहास में मौर्य काल के आधार पर विभाजित कर पढते हैं. इसी आधार पर मौर्य साम्राज्य को भारतीय इतिहास में मील का पत्थर कहा जाता है.

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