क्यों NDA लोगों के मन में आरजेडी के शासन काल का खौफ दिखा रही है?
https://youtu.be/ZO0RdoyIc84 बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए (NDA) के स्टार प्रचारक के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) अब तक छह चुनावी सभा…

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए (NDA) के स्टार प्रचारक के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) अब तक छह चुनावी सभा को संबोधित कर चुके हैं। प्रधानमंत्री की सभी रैलियों में लालू राबड़ी के शासनकाल के जिक्र के साथ, बिहार के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों का भी बखान किया गया है। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनडीए के तमाम नेता, बिहार की जनता को आरजेडी के शासनकाल में होने वाले अपराध और भ्रष्टाचार की याद दिलाने का मौका नहीं चूक रहे।
क्या लोगों को फिर सताने लगा है आरजेडी के शासन काल का भय
दरअसल भ्रष्टाचार के मामले में रांची की जेल में बंद लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के छोटे पुत्र और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की कमान अपने हाथ में ले रखी है। तेजस्वी यादव ने अपने चुनाव प्रचार का आगाज तो बेहतरीन तरीके से किया था। उन्होंने 58 फ़ीसदी युवा आबादी वाले बिहार में रोजगार का मुद्दा छेड़ एनडीए (NDA) की परेशानी बढ़ा दी थी। चार दिन पहले तक ऐसा लग रहा था कि इस बार का बिहार विधानसभा का चुनाव जातिगत आधार पर नहीं बल्कि मुद्दों पर आधारित होगा। तेजस्वी यादव की सभा में युवाओं की भीड़ भी जुट रही थी। लेकिन रोहतास में तेजस्वी यादव की एक गलती उन पर भारी पड़ती दिख रही है।

दरअसल रोहतास के चुनावी सभा में तेजस्वी यादव ने यह कहा था कि लालू जी के राज में गरीब भी बाबू साहब (बिहार में राजपूतों को बाबू साहब से संबोधित किया जाता है) के सामने भी सीना तान कर चलते थे। तेजस्वी के इस बयान को एनडीए ने अपना हथियार बनाया और आरजेडी पर फिर से जातिवाद और नक्सलवाद बढ़ाने की तोहमत जड़ दी। तेजस्वी यादव अब अपने इस एक बयान से चुनावी जंग 2020 में पिछड़े हुए दिखाई दे रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष के इस बयान ने उन गरीबों के मन में भी डर बिठाने का काम किया है, जो 1995 से 2005 के बीच में नरसंहार देख चुके हैं। अगड़ी जातियां तो वैसे भी आरजेडी के खिलाफ ही रही हैं। इस चुनाव में महागठबंधन के पक्ष में हवा बनता देख व्यापारी वर्ग भी चिंतित होने लगे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वास्तव में बिहार की जनता के मन में आज भी आरजेडी के शासनकाल का खौफ कायम है।
बिहार चुनाव प्रचार में उतरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में से कोई ऐसी रैली नहीं थी जिसमें, उन्होंने आरजेडी शासनकाल में होने वाले अपराध की चर्चा ना की हो। यहां तक कि आमतौर पर संयमित भाषा का प्रयोग करने वाले नीतीश कुमार ने भी लालू परिवार पर जिस तरीके से हमला किया यह लोगों की समझ से परे था। दरअसल एनडीए की तरफ से यह पुरजोर कोशिश की जा रही है कि बिहार की जनता खासकर युवा मतदाता जो पहली बार मतदान कर रहे हैं, वह आरजेडी के शासनकाल में होने वाले अपराध और नरसंहार को जान सकें।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पटना में कहा कि बिहार के लोगों को कोरोना से भी बचना है और बिहार को बीमार होने से भी बचाना है। उन्होंने आरजेडी पर हमला करते हुए कहा कि बिहार में जंगलराज लाने वाले एक बार फिर बिहार को बीमार करने के लिए जी जान लगाए हुए हैं। प्रधानमंत्री ने बिहार के मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि एनडीए के पक्ष में आपका एक वोट आपके परिवार को कोरोना से भी बचा सकता है और बिहार को बीमारू राज्य होने से भी बचा सकता है।



